सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर बनेगी समिति

सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों की सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सुविधाओं को लेकर केंद्र सरकार को अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने केंद्र को एक सप्ताह के भीतर समिति गठित करने को कहा है, जो पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों के लिए एक समान राष्ट्रीय नीति तैयार करने के मुद्दे पर विचार करेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र को समिति गठित करने के लिए अतिरिक्त एक सप्ताह का समय दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि केंद्र निर्धारित समय में समिति नहीं बनाता है तो वह खुद समिति गठित करने पर विचार कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई करीब 10 दिन बाद होगी।
प्रस्तावित समिति रिटायर्ड जजों को मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं की समीक्षा करेगी। इनमें ड्राइवर, सुरक्षा कर्मचारी, घरेलू सहायक, टेलीफोन सुविधा, चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति और यात्रा के दौरान आवास जैसी सुविधाएं शामिल हैं। अभी अलग-अलग राज्यों में इन सुविधाओं में काफी अंतर है।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी केंद्र को ऐसी समिति गठित करने और समान दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया था। अब केंद्र को समिति बनाने के साथ आगे की प्रक्रिया तेजी से पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य रिटायर्ड जजों की पोस्ट-रिटायरमेंट सुविधाओं में एकरूपता लाना है।
मुख्य बातें:
- केंद्र को एक सप्ताह में समिति गठित करने का निर्देश।
- रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों की सुविधाओं के लिए बनेगी राष्ट्रीय नीति।
- ड्राइवर, सुरक्षा, घरेलू सहायक और मेडिकल सुविधाओं की समीक्षा होगी।
- राज्यों में सुविधाओं के अंतर को दूर करने पर जोर।
- समिति नहीं बनी तो सुप्रीम कोर्ट खुद समिति बनाने पर विचार करेगा।



