वायुसेना प्रमुख अमरप्रीत सिंह ने क्यों कहा- देरी से मिली तकनीक न मिलने के बराबर

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने रक्षा परियोजनाओं में होने वाली देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि जरूरत के समय तकनीक उपलब्ध न होना लगभग उसके न मिलने के बराबर है। उनका बयान सैन्य आधुनिकीकरण और रक्षा उपकरणों की समयबद्ध आपूर्ति को लेकर आया है।
वायुसेना प्रमुख ने रक्षा परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और डिलीवरी में देरी को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि सेना को जिस समय किसी तकनीक या प्लेटफॉर्म की आवश्यकता होती है, उसी समय उसकी उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि बदलती युद्ध परिस्थितियों में समय सबसे अहम भूमिका निभाता है।
उनकी चिंता खासतौर पर लड़ाकू विमानों और अन्य आधुनिक रक्षा प्रणालियों की डिलीवरी से जुड़ी है। तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम में देरी को लेकर भी वायुसेना ने पहले अपनी जरूरतों और समयसीमा पर जोर दिया है।
अमरप्रीत सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक युद्ध में केवल तकनीक विकसित करना ही नहीं, बल्कि उसे समय पर सेना तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
वायुसेना प्रमुख का यह बयान रक्षा खरीद प्रक्रिया में सुधार, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निजी व सरकारी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को रेखांकित करता है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलते सुरक्षा माहौल में अत्याधुनिक तकनीक की समय पर उपलब्धता देश की रक्षा तैयारियों के लिए बेहद जरूरी है।
भारत लगातार स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन बड़ी परियोजनाओं में देरी को कम करना अभी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। समय पर डिलीवरी से न केवल वायुसेना की क्षमता बढ़ती है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में भी मदद मिलती है।



