
हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए हवन-पूजन और शुद्धिकरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दे रही है।
भाजपा ने कांग्रेस पर दलित राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जाति को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। भाजपा नेताओं का दावा है कि विपक्ष के पास ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए ऐसे विवादों को तूल दिया जा रहा है।
यह विवाद 8 अगस्त को खरगे की हल्द्वानी रैली के दो दिन बाद शुरू हुआ, जब 10 अगस्त को रामलीला मैदान में एक धार्मिक संगठन की ओर से हवन-पूजन और शुद्धिकरण कार्यक्रम किया गया। संगठन ने रैली के दौरान कथित नारों और टिप्पणियों को इसकी वजह बताया है।
कांग्रेस ने शुद्धिकरण की कार्रवाई को दलित समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए विरोध जताया। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए इसे छुआछूत से जोड़ा और कार्रवाई की मांग की।
भाजपा की ओर से इस पूरे मामले में संगठन की भूमिका से इनकार किया गया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि मैदान की धार्मिक मान्यताओं और कार्यक्रम के बाद की परिस्थितियों को देखते हुए शुद्धिकरण किया गया था। विवाद के बीच दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है।
हल्द्वानी का यह मामला अब दलित सम्मान, सामाजिक समानता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बड़े मुद्दे में बदलता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों इस घटनाक्रम को लेकर अपने-अपने पक्ष को मजबूती से जनता के सामने रख रहे हैं।



