जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल विवाद पर SC सख्त, केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस

दिल्ली के जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। 15 अक्टूबर 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा। अदालत ने कहा कि पहले संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब देने का अवसर दिया जाना चाहिए। यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो कानून अपना काम करेगा।
दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर की जगह अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और शाहदरा स्थित सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शन स्थलों के रूप में चिह्नित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला एक समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में स्पष्ट किया कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के किसी आदेश के सीधे पालन में नहीं, बल्कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था।
शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, छात्रों और विभिन्न आंदोलनों के लिए प्रमुख प्रदर्शन स्थल रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस स्थान को सूची से हटाने और प्रदर्शनकारियों को दूसरे स्थानों पर भेजने से लोगों के लिए अपनी बात सरकार तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। मामले में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने के अधिकार तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत के बीच संतुलन का सवाल भी अहम है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या रुख अपनाया?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित करने का तत्काल आदेश देने के बजाय केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत यह देखेगी कि प्रशासन ने स्थान को सूची से हटाने का फैसला किन कारणों और किस प्रक्रिया के आधार पर लिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए।
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। अदालत के सामने यह सवाल है कि क्या वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करते हैं और क्या जंतर-मंतर को सूची से हटाने का निर्णय उचित आधार पर लिया गया। अंतिम स्थिति अदालत की आगे की सुनवाई और आदेशों से स्पष्ट होगी।



