राधा अष्टमी व्रत 2026: क्या दोपहर तक रखना चाहिए व्रत? जानें पारण के नियम

राधा अष्टमी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन राधा रानी की पूजा करने से भक्तों को राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इस साल राधा अष्टमी का व्रत 19 सितंबर को रखा जाएगा।
व्रत को लेकर अलग-अलग परंपराओं में नियमों का पालन किया जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राधा अष्टमी के दिन पूजा और व्रत की अवधि को तिथि तथा पूजा के समय के अनुसार समझना चाहिए। इसलिए केवल दोपहर होते ही व्रत खोलने के बजाय अपने क्षेत्र की पंचांग गणना और मान्य परंपरा को ध्यान में रखना उचित माना जाता है।
राधा रानी की पूजा के दौरान भक्त स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद आरती और भोग अर्पित करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी मान्यता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का पालन करते हैं।
पारण यानी व्रत खोलने का समय भी व्रत की परंपरा और तिथि के अनुसार तय किया जाता है। इसलिए पारण से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को देखना बेहतर है। गर्भवती, बुजुर्ग, बीमार या नियमित दवा लेने वाले लोगों को उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
नोट: व्रत और पूजा के ये नियम धार्मिक एवं शास्त्रीय मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग पंचांग और परंपराओं में समय या विधि में अंतर हो सकता है।



