घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति लगाते समय न करें ये गलती, वरना हो सकता है अशुभ

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए कई लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर गणपति की मूर्ति या तस्वीर लगाते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है, लेकिन यदि शास्त्रों और वास्तु नियमों का पालन न किया जाए तो इसका उल्टा प्रभाव भी पड़ सकता है। सबसे पहला नियम यह है कि मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र ऐसी स्थिति में न हो कि वह सीधे बाहर की ओर देख रही हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार गणपति का मुख अंदर की ओर होना चाहिए, ताकि सकारात्मक ऊर्जा घर के भीतर प्रवेश करे। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि गणेश जी की मूर्ति खंडित, टूटी या पुरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ऐसी मूर्ति अशुभ मानी जाती है और इससे मानसिक तनाव तथा पारिवारिक कलह बढ़ सकती है। मूर्ति की ऊंचाई भी संतुलित होनी चाहिए, बहुत अधिक ऊंचाई पर या बिल्कुल जमीन के पास लगाना उचित नहीं माना जाता। साथ ही, गणेश जी की मुद्रा भी शांत और सौम्य होनी चाहिए, उग्र रूप वाली मूर्ति मुख्य द्वार के लिए उपयुक्त नहीं होती। वास्तु के अनुसार दाएं सूंड वाले गणेश जी को पूजा के लिए अधिक नियमों की आवश्यकता होती है, इसलिए मुख्य द्वार पर बाएं सूंड वाले गणपति को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा ध्यान रखें कि मुख्य द्वार पर बहुत अधिक देवी-देवताओं की तस्वीरें न लगाएं, केवल गणेश जी की एक स्पष्ट और साफ छवि ही पर्याप्त होती है। मूर्ति या चित्र के आसपास नियमित रूप से सफाई होनी चाहिए और वहां जूते-चप्पल या कूड़ा न रखें। मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से गणपति की कृपा बनी रहती है और घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है, लेकिन यदि इन बातों की अनदेखी की जाए तो जीवन में अनावश्यक बाधाएं, तनाव और अशांति बढ़ सकती है। इसलिए मुख्य द्वार पर गणपति की मूर्ति लगाने से पहले इन नियमों को जानना और समझना बेहद आवश्यक है।



