कालभैरव जयंती 2025: इस दिन करें कालभैरव कथा का पाठ, मिलेगी हर संकट से मुक्ति

कालभैरव जयंती 2025 हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव के भयंकर रूप कालभैरव का प्राकट्य हुआ था। मान्यता है कि भगवान कालभैरव की पूजा और कथा का पाठ करने से भक्त को सभी प्रकार के भय, बुरे ग्रह, और नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति मिलती है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है जो जीवन में रुकावटों, आर्थिक कठिनाइयों या मानसिक तनाव से गुजर रहे हों।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। तब भगवान शिव ने इस विवाद को समाप्त करने के लिए अपने क्रोधित रूप कालभैरव को प्रकट किया। कालभैरव ने अपने त्रिशूल से ब्रह्मा जी के अहंकार स्वरूप पंचम सिर को काट दिया। उसी क्षण से उन्हें ‘क्षेत्रपाल’ और ‘काल के स्वामी’ कहा गया। यह कथा दर्शाती है कि अहंकार का नाश और धर्म की रक्षा के लिए भगवान कालभैरव सदैव जागृत रहते हैं।
इस दिन भक्त प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करते हैं और भैरव मंदिर में जाकर तेल का दीपक जलाते हैं। सत्तू, उड़द, सरसों के तेल, नारियल, और काले तिल का विशेष रूप से भोग लगाया जाता है। कालभैरव जी को काले कुत्ते को भोजन कराने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
कथा पाठ के समय “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जप करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है। भक्तों का विश्वास है कि कालभैरव जयंती के दिन की गई पूजा और व्रत से भैरव बाबा की कृपा प्राप्त होती है, जिससे भय, रोग और शत्रु सब नष्ट हो जाते हैं।
इस वर्ष 2025 में कालभैरव जयंती पर विशेष योग बन रहा है, जो इसे और अधिक फलदायी बनाता है। अतः श्रद्धापूर्वक कथा-पाठ और पूजन करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन में शांति, सुरक्षा व समृद्धि का संचार होता है।



