Makar Sankranti 2026: एकादशी के शुभ संयोग में मकर संक्रांति, जानें स्नान-दान मुहूर्त और नियम

मकर संक्रांति 2026 इस बार बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इस पावन पर्व पर एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जिसे पुण्यकाल की शुरुआत माना जाता है। वहीं एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। जब मकर संक्रांति और एकादशी एक साथ पड़ती हैं, तो इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास माना जाता है।
मकर संक्रांति 2026 पर प्रातःकाल पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ रहेगा। मान्यता है कि सूर्योदय से लेकर पुण्यकाल तक किया गया स्नान व्यक्ति के सभी पापों को नष्ट करता है। गंगा, यमुना, गोदावरी या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए।
इस दिन दान का विशेष महत्व है। तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र, अन्न और दक्षिणा का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। खासतौर पर तिल और गुड़ का दान मकर संक्रांति पर अत्यंत फलदायी माना गया है। एकादशी के संयोग के कारण इस दिन सात्विक भोजन करना या उपवास रखना भी शुभ माना जाता है। जो लोग उपवास नहीं कर सकते, वे फलाहार कर सकते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण करते रहें।
पूजा विधि की बात करें तो स्नान-दान के बाद भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए। पीले फूल, अक्षत, दीपक और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्रों का पाठ करना विशेष लाभकारी माना जाता है। माना जाता है कि इस शुभ संयोग में किए गए धार्मिक कार्यों से व्यक्ति को मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
कुल मिलाकर मकर संक्रांति 2026 पर एकादशी का यह दुर्लभ संयोग आत्मशुद्धि, दान-पुण्य और ईश्वर भक्ति के लिए अत्यंत उत्तम अवसर है। इस दिन नियम और श्रद्धा के साथ किए गए कर्म जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल प्रदान करते हैं।



