गुरिंदरवीर सिंह ने 10.09 सेकंड में 100 मीटर दौड़कर रचा इतिहास, तेजस्विन शंकर डेकाथलॉन में 8000 पॉइंट्स पार करने वाले बने पहले भारतीय

राष्ट्रीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दूसरे दिन पंजाब के धावक गुरिंदरवीर सिंह ने पुरुषों की 100 मीटर स्प्रिंट दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10.09 सेकंड का समय निकालकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ वे भारतीय एथलेटिक्स इतिहास के सबसे तेज धावक बन गए हैं।
रिलायंस फाउंडेशन का प्रतिनिधित्व कर रहे 25 वर्षीय गुरिंदरवीर ने अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी ओडिशा के अनिमेष कुजूर को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। फाइनल में उन्होंने अनिमेष को करीब दो फीट से भी ज्यादा के अंतर से हराया।
सेमीफाइनल में दो बार टूटा रिकॉर्ड
प्रतियोगिता रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई जब शुक्रवार को सेमीफाइनल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड मात्र कुछ मिनटों के अंदर दो बार टूटा। पहले गुरिंदरवीर सिंह ने 10.17 सेकंड का समय निकालकर पूर्व रिकॉर्ड (10.18 सेकंड) को तोड़ा, जिसे अनिमेष कुजूर ने पिछले साल बनाया था।
कुछ ही देर बाद 22 वर्षीय अनिमेष ने दूसरे हीट में 10.15 सेकंड का समय दर्ज कर रिकॉर्ड वापस अपने नाम कर लिया। लेकिन फाइनल में गुरिंदरवीर सिंह ने सभी को चौंकाते हुए 10.09 सेकंड का प्रदर्शन किया और 10.10 सेकंड से कम समय में दौड़ने वाले पहले भारतीय बन गए।
तीसरा स्थान रिलायंस फाउंडेशन के ही प्रणव गुरव ने 10.29 सेकंड के साथ हासिल किया।
गुरिंदरवीर सिंह की बड़ी उपलब्धियां
गुरिंदरवीर सिंह का 10.09 सेकंड का समय 2026 राष्ट्रमंडल खेलों के क्वालीफाइंग स्टैंडर्ड (10.16 सेकंड) से बेहतर है, जिससे उन्होंने क्वालिफिकेशन हासिल कर लिया है। यह समय इस सीजन में एशिया का दूसरा सबसे तेज है। मई में जापान के 19 वर्षीय फुकुतो कोमुरो ने 10.08 सेकंड का समय बनाया था।
गुरिंदरवीर सिंह कौन हैं?
पंजाब के रहने वाले गुरिंदरवीर सिंह शॉर्ट स्प्रिंट इवेंट्स के विशेषज्ञ हैं। इस उपलब्धि के बाद उन्हें ‘भारतीय इतिहास के सबसे तेज धावक’ का खिताब मिला है। वे एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी क्वालीफाई कर चुके हैं।
100 मीटर दौड़ का विश्व रिकॉर्ड
पुरुषों की 100 मीटर दौड़ का विश्व रिकॉर्ड 9.58 सेकंड है, जो दिग्गज जमैकन एथलीट उसेन बोल्ट के नाम दर्ज है। उन्होंने यह रिकॉर्ड 2009 में बर्लिन विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बनाया था।
गुरिंदरवीर सिंह का यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय है और आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में भारत की उम्मीदों को मजबूती देता है।



