कहां हैं धोनी की सेना के ‘योद्धा’? 2016 के बाद कैसे बदली भारतीय क्रिकेट टीम

साल 2016 भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक अहम पड़ाव था। यह वह दौर था जब महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी का असर भले ही सीमित हो रहा था, लेकिन उनकी बनाई हुई टीम की रीढ़ बेहद मजबूत थी। उस समय टीम इंडिया में धोनी के साथ विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन, सुरेश रैना, युवराज सिंह, रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा, भुवनेश्वर कुमार और उमेश यादव जैसे खिलाड़ी शामिल थे। ये वही ‘योद्धा’ थे, जिन्होंने भारत को आईसीसी टूर्नामेंट्स में मजबूत पहचान दिलाई और विदेशी सरजमीं पर भी टीम को प्रतिस्पर्धी बनाया। लेकिन बीते एक दशक में क्रिकेट की तस्वीर तेजी से बदली और उसके साथ बदल गई टीम इंडिया की संरचना भी।
धोनी ने 2017 के बाद धीरे-धीरे सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ी और 2020 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे मैच विनर पहले ही संन्यास ले चुके थे, जबकि शिखर धवन अब टीम के नियमित सदस्य नहीं रहे। अश्विन और जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ी अब भी टेस्ट क्रिकेट में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन सीमित ओवरों में उनकी जगह युवा ऑलराउंडर्स ने ले ली है। भुवनेश्वर कुमार और उमेश यादव की रफ्तार और स्विंग ने कभी टीम को मजबूती दी थी, पर अब तेज गेंदबाजी की कमान जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाजों के हाथों में है।
2016 के बाद टीम इंडिया ने फिटनेस, आक्रामकता और बेंच स्ट्रेंथ पर खास ध्यान दिया। विराट कोहली के कप्तानी दौर में टीम ने टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छुआ, जबकि रोहित शर्मा की अगुवाई में सीमित ओवरों में संतुलन देखने को मिला। आज शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्या और कुलदीप यादव जैसे खिलाड़ी नई पीढ़ी का चेहरा बन चुके हैं। धोनी की ‘योद्धा’ ब्रिगेड भले ही मैदान से दूर हो गई हो, लेकिन उनकी सोच, रणनीति और जीत की भूख आज भी टीम इंडिया की पहचान बनी हुई है।



