टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक क्यों हुआ दुर्लभ? हरभजन सिंह ने बताई बल्लेबाजों की कमजोरी

टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक अब ईद के चांद जैसा दुर्लभ होता जा रहा है। इसी मुद्दे पर पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने बल्लेबाजों की बदलती मानसिकता और T20 क्रिकेट के प्रभाव को बड़ी वजह बताया है। उनके मुताबिक मौजूदा दौर के बल्लेबाजों में पहले की पीढ़ी जैसा धैर्य कम देखने को मिलता है।
हरभजन ने कहा कि T20 के दौर में बल्लेबाजी काफी आक्रामक हो गई है। बल्लेबाज ज्यादा शॉट खेलने की कोशिश करते हैं और इसी वजह से लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता प्रभावित होती है। उनके अनुसार, 250 या 300 रन की पारी खेलने के लिए जिस धैर्य की जरूरत होती है, वह अब कम बल्लेबाजों में दिखाई देता है।
पहले तिहरे शतक लगाना आम क्यों लगता था?
हरभजन ने पिछली पीढ़ी के कई दिग्गजों का उदाहरण दिया। ब्रायन लारा, क्रिस गेल, वीरेंद्र सहवाग और मैथ्यू हेडन जैसे बल्लेबाजों ने टेस्ट क्रिकेट में तिहरे शतक लगाए। लारा तो 400 रन की ऐतिहासिक पारी भी खेल चुके हैं। एबी डिविलियर्स और जैक्स कैलिस जैसे बल्लेबाजों ने भी टेस्ट में बड़े दोहरे शतक बनाए।
इसके मुकाबले हाल के वर्षों में तिहरे शतक बेहद कम देखने को मिले हैं। हाल में ऐसा करने वाले बल्लेबाजों में पाकिस्तान के अजहर अली (2016), ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर (2019), इंग्लैंड के हैरी ब्रूक (2024) और दक्षिण अफ्रीका के वियान मुल्डर (2025) शामिल हैं।
T20 ने बदली टेस्ट बल्लेबाजी
हरभजन के मुताबिक पिछले दो दशक में टेस्ट क्रिकेट खेलने का तरीका काफी बदल गया है। बल्लेबाजी की रफ्तार बढ़ी है और आक्रामकता टेस्ट क्रिकेट का भी अहम हिस्सा बन गई है। इसका असर गेंदबाजों पर भी पड़ा है, खासकर स्पिनरों को आक्रामक बल्लेबाजों के खिलाफ अपनी रणनीति लगातार बदलनी पड़ी है।
उन्होंने इंग्लैंड की बैजबॉल शैली का उदाहरण देते हुए कहा कि टीम तेजी से रन बनाने की कोशिश करती है, लेकिन इसी आक्रामकता के कारण कभी-कभी 70-80 रन के स्कोर पर भी पूरी टीम आउट हो सकती है। यानी आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में जोखिम और रफ्तार दोनों बढ़े हैं।
क्या तिहरे शतक का दौर खत्म हो रहा है?
ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। आधुनिक बल्लेबाजों के पास बड़े स्कोर बनाने की क्षमता अभी भी है, लेकिन टेस्ट मैचों में लंबे समय तक एकाग्रता और धैर्य बनाए रखना पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है। T20 क्रिकेट ने बल्लेबाजी की तकनीक और सोच दोनों को प्रभावित किया है।
हरभजन की बात का सार यही है कि टेस्ट क्रिकेट में तेजी जरूरी है, लेकिन बड़े स्कोर के लिए धैर्य भी उतना ही जरूरी है। अगर बल्लेबाज आक्रामकता और संयम के बीच संतुलन बना पाए, तो आने वाले समय में तिहरे शतक फिर से देखने को मिल सकते हैं।



