उत्तर प्रदेशलखनऊ

आसान हो रही गोद लेने की प्रक्रिया

टेम्पल ऑफ हीलिंग ने दाखिल की थी सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका

लखनऊ। देश में हिन्दू दत्तक ग्रहण कानून के नियमों को समझने और समझाने में सम्बंधित तंत्र की हीलाहवाली से बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया बहुत जटिल रही, पर अब इस प्रक्रिया में सरलता आ रही है। इस सम्बन्ध में एक प्रमुख सामाजिक संगठन टेम्पल आफ हीलिंग के प्रतिनिधि डा.पीयूष सक्सेना ने पत्रकारों को बताया कि भारत में गोद लेने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के मकसद से सुप्रीम कोर्ट में अगस्त 2021 में जनहित याचिका दाखिल की थी। इसे उच्चतम न्यायालय ने संज्ञान में लिया और 12 से अधिक सुनवाइयों के बाद उसके आदेशों से कठिन राह आसान हुई।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया।

 

कोर्ट ने युवा दम्पतियों को बच्चा गोद लेने के लिए तीन-चार साल इंतजार कराना सही नहीं ठहराते हुए प्रक्रिया सही करने की आवश्यकता बतायी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में ये भी साफ किया है कि हिन्दू दत्तक ग्रहण कानून में जुविनाइल जस्टिस एक्ट 2015 सेक्शन-56(3) के अनुसार एडाप्शन रेगुलेशंस 2022 का कोई दखल नहीं है।डा. सक्सेना के कथनानुसार ऐसे में बच्चा गोद लेना बहुत आसान हो जाता है। इसी क्रम में कोर्ट ने देश के सभी 760 जिलों में दत्तक ग्रहण एजेंसियां नियुक्त करने को कहा। उन्होंने बताया कि सख़्त क़ानून होने के बावजूद अमेरिका में हर साल एक लाख 35 हजार बच्चे गोद लिये जाते हैं, जबकि भारत मे उलझी हुई प्रक्रिया के कारण बमुश्किल प्रति वर्ष चार हजार। देश में 3.1 करोड़ बच्चे अनाथ हैं, वहीं ढाई करोड़ से भी बहुत ज्यादा दंपतियां संतान सुख के लिए तरसती हैं। हर बच्चे का अधिकार है कि उसे परिवार मिले।हमारी याचिका इन दोनों के बीच सेतु बनी।
यह कदम उन लाखों अनाथ बच्चों और संतान सुख से वंचित दंपतियों के लिए आशा की किरण बना, जो एक बेहतर भविष्य की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई राज्यों ने अपनी गोद लेने की नीतियों पर पुनर्विचार भी शुरू कर दिया है।

Also read this: बिजली कंपनियों का निजीकरण आम उपभोक्तओं को गहरी चोट

इसी वर्ष 20 अगस्त से अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा या कानूनी रूप से अलग रह रहे 35 से 60 साल की उम्र के अकेले लोगों को भी बच्चे को गोद लेने की अनुमति दे दी गयी है।
उन्होंने बताया कि याचिका के क्रम में गोद लेने की प्रक्रिया के सरलीकरण और डिजिटलीकरण से लंबी और जटिल प्रक्रियाओं पर विराम लगेगा। साथ ही पारदर्शिता बढ़ने से गोद लेने योग्य बच्चों और इच्छुक माता-पिता के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा और गोद लेने के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर होंगी। इस मुद्दे पर अब मीडिया और समाज में चर्चा तेज हो गई है, जिससे सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि आगे उनका संगठन अविवाहित, एलजीबीटी और अन्य समुदायों को भेदभाव मुक्त गोद लेने का अधिकार सुनिश्चित करने पर काम करेगा। गोद लेना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, यह एक सामाजिक जिम्मेदारी है।

Computer Jagat 24

Founded in 2018, Computer Jagat24 has quickly emerged as a leading news source based in Lucknow, Uttar Pradesh. Our mission is to inspire, educate, and outfit our readers for a lifetime of adventure and stewardship, reflecting our commitment to providing comprehensive and reliable news coverage.

संबंधित समाचार

Back to top button