लखनऊ का 88 साल पुराना कॉफी हाउस बंद, यादों में रह गया इतिहास

इंडियन कॉफी हाउस सिर्फ कॉफी पीने की जगह नहीं था, बल्कि लखनऊ की राजनीतिक और साहित्यिक संस्कृति का अहम हिस्सा रहा। यहां एक कप कॉफी के साथ देश-दुनिया, राजनीति, साहित्य और सामाजिक मुद्दों पर घंटों बहस हुआ करती थी।
इस ऐतिहासिक कॉफी हाउस में जवाहरलाल नेहरू, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. राम मनोहर लोहिया और चंद्रशेखर जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी की यादें जुड़ी हैं। उत्तर प्रदेश के कई पूर्व मुख्यमंत्री भी यहां नियमित रूप से आते रहे।
साहित्यकारों और पत्रकारों के लिए भी यह जगह बेहद खास थी। यशपाल, भगवती चरण वर्मा, अमृतलाल नागर और मजाज लखनवी जैसे साहित्यिक नाम यहां बैठकर विचार-विमर्श करते थे। कॉफी हाउस में साहित्य और राजनीति के अलग-अलग समूहों की चर्चाएं घंटों चलती थीं।
कॉफी हाउस से जुड़े कई राजनीतिक किस्से आज भी चर्चित हैं। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद वीर बहादुर सिंह सीधे यहां पहुंचे थे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी वर्ष 2002 में लखनऊ आने पर कॉफी हाउस गए थे।
समय के साथ लखनऊ में कैफे संस्कृति बदली और डिजिटल दौर में राजनीतिक-सामाजिक चर्चाओं का तरीका भी बदल गया। इसके बावजूद इंडियन कॉफी हाउस अपनी पुरानी पहचान के साथ लंबे समय तक कायम रहा। पिछले कुछ वर्षों में यह कई बार संकट का सामना कर चुका है और अब फिर करीब तीन महीने से बंद है।
कॉफी हाउस का बंद होना लखनऊ की पुरानी बौद्धिक संस्कृति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। शहर के पुराने पत्रकार, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता इसे सिर्फ एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि स्वतंत्र विचार और संवाद की ऐतिहासिक जगह मानते हैं। अब लोगों को इसके दोबारा खुलने का इंतजार है।



