वाराणसी में बाढ़ का खतरा: मोदी ने DM से पूछी तैयारी, गंगा खतरे के निशान के करीब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) से तैयारियों की जानकारी ली है। गंगा नदी इन दिनों तेजी से बढ़ रही है और अब यह खतरे के निशान से मात्र 39 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। नदी का पानी शहर की कई निचली बस्तियों और सड़कों तक पहुंच चुका है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि बाढ़ से निपटने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं और आम जनता को राहत कैसे दी जा रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रशासन को सतर्क रहना होगा। मोदी ने यह भी कहा कि वाराणसी धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण शहर है, इसलिए यहां किसी भी आपदा से निपटने के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम होना चाहिए।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि बाढ़ राहत शिविर तैयार कर लिए गए हैं, नावों और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है, और निचले इलाकों में रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी फैलने से रोका जा सके।
गंगा का बढ़ता जलस्तर अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, राजघाट और आस-पास के इलाकों में पानी भरने का कारण बन गया है। दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खुद हालात की समीक्षा करना इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यदि बारिश इसी तरह जारी रही, तो बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और जनता दोनों को मिलकर सतर्कता बरतनी होगी।



