यूपी में इको-टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट | थारू-थाली व चंदन चौकी शिल्पग्राम का विकास

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में इको-टूरिज्म को नई दिशा देने की तैयारी में है। हाल के वर्षों में जिस प्रकार से पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन की मांग बढ़ी है, वह न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय समुदायों की आर्थिक समृद्धि में भी यह एक बड़ा कदम है। इसी कड़ी में सरकार ने थारू जनजाति के पारंपरिक भोजन ‘थारू-थाली’ और चंदन चौकी शिल्पग्राम को विशेष रूप से विकसित करने की योजना बनाई है। थारू जनजाति उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में निवास करती है और उनकी संस्कृति, भोजन, परंपराएं तथा जंगलों से जुड़ी जीवनशैली पर्यटकों को हमेशा आकर्षित करती रही है।
सरकार का उद्देश्य है कि थारू संस्कृति को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय जनजाति को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएं। ‘थारू-थाली’ को प्रमोट करने से न केवल इस क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि महिला स्वयं-सहायता समूहों को भी बेहतर आय का स्रोत प्राप्त होगा। थारू व्यंजनों में स्थानीय अनाज, जंगल की जड़ी-बूटियों और देसी स्वाद का मेल होता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से भी अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। पर्यटक अब सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति को समझने और अनुभव करने के लिए भी आते हैं। ऐसे में थारू भोजन और संस्कृति आधारित पर्यटन बड़ी भूमिका निभा सकता है।
इसके साथ ही चंदन चौकी शिल्पग्राम को विकसित करने की योजना एक और अहम कदम है। शिल्पग्राम का उद्देश्य है कि स्थानीय कारीगरों की कला, लकड़ी शिल्प, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को एक मंच दिया जाए। इससे कारीगरों को अपने उत्पाद सीधे पर्यटकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा और उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। सरकार का मानना है कि यदि पर्यटन को स्थानीय कारीगरी और संस्कृति से जोड़ा जाए, तो इससे न केवल पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव मिलता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है।
इको-टूरिज्म के विकास से वन क्षेत्रों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। जब स्थानीय समुदायों को पर्यटन से लाभ मिलता है, तो वे प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के प्रति और अधिक सजग हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के ये प्रयास न केवल पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे, बल्कि राज्य की स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों को भी वैश्विक मंच पर स्थापित करेंगे।



