यूपी में शत्रु संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी, सरकार को 1000 करोड़ राजस्व की उम्मीद

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी शत्रु संपत्तियां अब सरकारी खजाना भरने का बड़ा जरिया बनने जा रही हैं। राज्य सरकार इन संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी की तैयारी में जुट गई है और अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे करीब 1000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है। शत्रु संपत्तियां वे होती हैं, जो उन लोगों की थीं जिन्होंने विभाजन या बाद के वर्षों में भारत छोड़कर दूसरे देशों की नागरिकता ले ली थी। ऐसी संपत्तियां वर्षों से कानूनी प्रक्रियाओं, कब्जों और प्रशासनिक उलझनों में फंसी रहीं, लेकिन अब सरकार इन्हें व्यवस्थित तरीके से बाजार में लाकर आर्थिक संसाधन में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है।
बताया जा रहा है कि कई जिलों में फैली इन संपत्तियों की पहचान, सीमांकन और दस्तावेजीकरण का काम तेज कर दिया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ई-ऑक्शन प्रक्रिया अपनाने से पारदर्शिता बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा बोलीदाता हिस्सा ले सकेंगे। इससे सरकार को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों का मानना है कि जो जमीनें और भवन वर्षों से खाली पड़े थे या जिन पर अवैध कब्जे की शिकायतें मिलती रही हैं, वे अब विकास और निवेश का आधार बनेंगे।
राज्य सरकार की योजना है कि नीलामी से मिलने वाली राशि को बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और स्थानीय विकास कार्यों में लगाया जाए। इससे एक तरफ राजस्व बढ़ेगा तो दूसरी तरफ इन संपत्तियों का उत्पादक उपयोग भी सुनिश्चित होगा। कई जगहों पर ये संपत्तियां बेहद प्राइम लोकेशन पर हैं, जहां रियल एस्टेट की मांग काफी ज्यादा है। ऐसे में निवेशकों की रुचि भी बढ़ने की संभावना है।
ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी इंतजाम किए जा रहे हैं। इच्छुक खरीदारों को पूरी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसी तरह के विवाद या भ्रम की स्थिति न बने। सरकार का जोर इस बात पर है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से मजबूत हो और भविष्य में किसी प्रकार की चुनौती सामने न आए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल रहती है तो न केवल राज्य की आय में बढ़ोतरी होगी, बल्कि वर्षों से बेकार पड़ी संपत्तियां आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन सकती हैं। रोजगार के अवसर पैदा होंगे और शहरी विकास को नई गति मिलेगी। कुल मिलाकर, शत्रु संपत्तियों की ई-नीलामी उत्तर प्रदेश के लिए राजस्व जुटाने के साथ-साथ संपत्ति प्रबंधन का एक बड़ा मॉडल साबित हो सकती है।



