UP में सख्ती का असर: 3 लाख टन घटी उर्वरक खपत, तकनीक से कालाबाजारी पर रोक

उत्तर प्रदेश में उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार द्वारा लागू की गई सख्त निगरानी और तकनीकी उपायों का बड़ा असर देखने को मिला है। राज्य में खाद की खपत में करीब 3 लाख टन की कमी दर्ज की गई है, जिसे प्रशासन अपनी बड़ी सफलता मान रहा है। दरअसल, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि किसानों के नाम पर उठाई जा रही खाद का एक हिस्सा खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इससे न केवल किसानों को परेशानी होती थी बल्कि सरकारी सब्सिडी का लाभ भी गलत हाथों में चला जाता था। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पीओएस मशीनों, आधार आधारित सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू कीं। अब खाद की बिक्री सीधे पंजीकृत किसानों को ही हो रही है और हर बोरी का रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक पहले जहां कागजी प्रक्रिया का फायदा उठाकर गड़बड़ी की गुंजाइश रहती थी, वहीं अब तकनीक के कारण पारदर्शिता बढ़ी है। जिलों में लगातार निरीक्षण, संदिग्ध बिक्री पर तुरंत अलर्ट और स्टॉक की ऑनलाइन ट्रैकिंग से कालाबाजारी करने वालों पर नकेल कसी गई है। कई जगहों पर लाइसेंस निलंबन और एफआईआर जैसी कार्रवाई भी हुई है, जिससे सख्त संदेश गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक जरूरत के मुताबिक खाद का उपयोग होना खेती और मिट्टी दोनों के लिए बेहतर है। अधिक मात्रा में उर्वरक डालने से उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होती, बल्कि लागत बढ़ती है और जमीन की सेहत पर भी असर पड़ता है। ऐसे में खपत में आई कमी को संतुलित उपयोग की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि आगे भी तकनीक आधारित निगरानी को और मजबूत किया जाएगा ताकि किसानों को समय पर, उचित दाम पर खाद मिल सके और किसी तरह की जमाखोरी या कालाबाजारी की गुंजाइश न रहे।



