यूपी में लेबर रूम में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती होगी अनिवार्य, नवजात मृत्यु दर घटाने पर मंथन

उत्तर प्रदेश में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण मंथन किया है। इस दौरान सुझाव दिया गया कि सभी प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों के लेबर रूम में बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) की तैनाती अनिवार्य की जाए, ताकि जन्म के तुरंत बाद नवजात को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म के शुरुआती कुछ मिनट और घंटे नवजात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी शिशु को सांस लेने में कठिनाई, संक्रमण या अन्य चिकित्सकीय जटिलता होती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ की तत्काल उपलब्धता उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
बैठक में नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता बढ़ाने और आपातकालीन नवजात देखभाल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रसव पूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव, सुरक्षित प्रसव प्रक्रिया और जन्म के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता का मजबूत तंत्र आवश्यक है। इसी दिशा में बाल रोग विशेषज्ञों की भूमिका को और महत्वपूर्ण माना गया है।
राज्य सरकार पहले से ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है। नई पहल के माध्यम से नवजातों को जन्म के समय ही विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार देखने को मिल सकता है।



