उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

ज्ञान केंद्र बनेंगे पुस्तकालय: प्रदेश के 75 जिलों में राष्ट्रीय ई-पुस्तकाल, डिजिटल कंटेंट की जाएगी उपलब्धता सुनिश्चित

प्रदेश के सभी जिलों में पुस्तकालयों को नई पुस्तकों के साथ-साथ इंटरनेट सुविधाओं से जोड़कर आम लोगों और विद्यार्थियों के लिए ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय योजना के तहत पुस्तकालयों में डिजिटल कंटेंट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

इन पुस्तकालयों की गतिविधियों को सोशल मीडिया के माध्यम से अपडेट किया जाएगा और पुस्तकों के निर्गत करने की प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शिक्षा निदेशालय में आयोजित बैठक में केंद्रीय राज्य पुस्तकालय व प्रदेश के सभी जिलों के पुस्तकालयाध्यक्षों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिए।

प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों को जनसामान्य के लिए अधिक उपयोगी, सुलभ एवं प्रभावी बनाने को लेकर बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। प्रदेश के नवाचार करने वाले पुस्तकालयों द्वारा पीपीटी के माध्यम से अपने कार्यों और अभिनव प्रयोगों का प्रस्तुतीकरण भी किया गया।

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन पुस्तकालयों की अच्छी पहल को मॉडल के रूप में अपनाते हुए प्रदेशभर के पुस्तकालयों में भी तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। उन्होंने पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों के संग्रहण स्थल न मानते हुए उन्हें ‘ज्ञान केंद्र’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में विशेष सचिव उमेश चंद्र, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) महेंद्र देव, अपर शिक्षा निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) मनोज कुमार द्विवेदी व विशेष कार्याधिकारी (पुस्तकालय) सात्वना तिवारी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पठन संस्कृति के लिए तैयार हुआ रोडमैप

पठन संस्कृति के विस्तार के लिए अपर मुख्य सचिव ने एक नया रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने निर्देश दिए कि पुस्तकालय बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करें। शिक्षक स्वयं पुस्तकालयों और पुस्तकों से सक्रिय रूप से जुड़ें तथा उनके माध्यम से विद्यार्थियों को भी पुस्तकालयों से जोड़ा जा सके।

वरिष्ठ नागरिकों को भी पुस्तकालय से जोड़ेंगे

पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय सहभागिता पुस्तकालयों से जोड़ी जाएगी। उनके लिए विशेष पठन कार्यक्रम, चर्चा सत्र और ज्ञान-संवाद आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय समाज की भागीदारी से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए।

लेखक संवाद कार्यक्रम भी होंगे

पुस्तकालयों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रकाशकों, लेखकों और पुस्तक विक्रेताओं के साथ नियमित संपर्क रखा जाएगा। इसके अलावा ‘लेखक-संवाद’ कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

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