मिड-डे मील रसोइयों को रक्षाबंधन का तोहफा, मानदेय ₹3,000; ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 अगस्त 2026 को लखनऊ में आयोजित रसोइया सम्मान कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत काम करने वाले रसोइयों के लिए इन सुविधाओं की घोषणा की। सरकार के मुताबिक प्रदेश में करीब 3.54 लाख रसोइये हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं की है।
अब हर महीने मिलेंगे ₹3,000
रसोइयों का मौजूदा मानदेय ₹2,000 प्रति माह था। नई घोषणा के बाद इसे बढ़ाकर ₹3,000 कर दिया गया है। यानी हर रसोइये को हर महीने ₹1,000 अधिक मिलेंगे। यह अतिरिक्त राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी।
₹5 लाख तक कैशलेस इलाज
रसोइयों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को भी इस घोषणा का अहम हिस्सा बनाया गया है। उन्हें हर साल ₹5 लाख तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य गंभीर बीमारी या अस्पताल में इलाज के समय परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
दुर्घटना में ₹2 लाख की तत्काल मदद
सरकार के अनुसार रसोइयों के बैंक खाते को सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर दुर्घटना जैसी अप्रिय स्थिति में ₹2 लाख तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ व्यवस्था की गई है।
93% से ज्यादा महिलाएं
इस योजना से जुड़े रसोइयों में लगभग 93 प्रतिशत महिलाएं हैं। इसलिए सरकार ने इसे रक्षाबंधन के अवसर पर महिला रसोइयों के लिए विशेष सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के कदम के रूप में पेश किया है।
सिर्फ मानदेय ही नहीं, सामाजिक सुरक्षा भी
सरकार का कहना है कि पहले रसोइयों के सामने दुर्घटना, दिव्यांगता या मृत्यु जैसी परिस्थितियों में परिवार के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा का अभाव था। नई व्यवस्था में आर्थिक सहायता और स्वास्थ्य सुविधा को जोड़ने की कोशिश की गई है।
बच्चों के मिड-डे मील में अहम भूमिका
परिषदीय स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी रसोइयों की होती है। राज्य में लगभग 1.41 लाख परिषदीय स्कूलों में करीब 1.46 करोड़ बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में रसोइये प्रधानमंत्री पोषण योजना के जमीनी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निष्कर्ष: रक्षाबंधन से पहले यूपी सरकार की घोषणा से करीब 3.54 लाख रसोइयों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मानदेय ₹2,000 से बढ़कर ₹3,000 होने के साथ ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज और दुर्घटना की स्थिति में ₹2 लाख की सहायता का प्रावधान उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।



