यूपी पंचायतों में विकास कार्य सुस्त, भुगतान अटका

उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। इसके बाद ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गति प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर नई योजनाओं को शुरू करने और पुराने कार्यों को आगे बढ़ाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
प्रशासकों को पंचायतों की जिम्मेदारी तो सौंप दी गई है, लेकिन विकास कार्यों को लेकर उनके अधिकारों और वित्तीय शक्तियों के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार है। इस वजह से पंचायत स्तर पर निर्णय लेने में भी सावधानी बरती जा रही है।
विकास कार्यों की रफ्तार धीमी होने का असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। सड़क, नाली, पेयजल, सफाई और अन्य जरूरी कार्यों से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी की स्थिति बन रही है। ग्रामीणों को भी कई कामों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
पंचायतों में पहले से कराए जा चुके विकास कार्यों के भुगतान को लेकर भी समस्या सामने आ रही है। भुगतान प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं होने के कारण कई कार्यदायी संस्थाओं और संबंधित लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर अब शासन की ओर से जारी होने वाले दिशा-निर्देशों पर है। स्पष्ट गाइडलाइन मिलने के बाद प्रशासकों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
पंचायतों में विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जल्द निर्णय की जरूरत महसूस की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के साथ ही लंबित भुगतान की प्रक्रिया को भी सुचारु करना जरूरी माना जा रहा है।
पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने और नई पंचायतों के गठन तक प्रशासकों के माध्यम से ही पंचायतों का संचालन किया जाना है। ऐसे में विकास कार्यों और वित्तीय गतिविधियों के संचालन के लिए स्पष्ट व्यवस्था ग्रामीण विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।



