सोशल मीडिया पर पाबंदी? LinkedIn एक्टिविटी पर कंपनी की चेतावनी से मचा बवाल

सोशल मीडिया के दौर में जहां प्रोफेशनल नेटवर्किंग को करियर का अहम हिस्सा माना जाता है, वहीं एक भारतीय कंपनी का फरमान अब विवादों में घिर गया है। मामला LinkedIn से जुड़ा है, जहां कंपनी ने अपने कर्मचारियों को साफ चेतावनी दी कि यदि उन्होंने बिना अनुमति किसी पोस्ट पर लाइक या कमेंट किया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस कथित आदेश के सामने आते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया और यूजर्स ने इसे ‘दादागिरी’ करार देना शुरू कर दिया। कई लोगों का कहना है कि LinkedIn कोई निजी कंपनी का प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल सोशल नेटवर्क है, जहां विचार साझा करना और प्रतिक्रियाएं देना हर व्यक्ति का अधिकार है। यूजर्स का तर्क है कि ऑफिस टाइम में काम की सीमाएं समझ में आती हैं, लेकिन निजी समय में सोशल मीडिया पर एक्टिविटी पर रोक लगाना पूरी तरह गलत है।
इस फरमान के सामने आते ही LinkedIn और X (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर कर्मचारी अपनी पहचान और प्रोफाइल के साथ कोई सामान्य लाइक या कमेंट करता है, तो इससे कंपनी की छवि कैसे खराब हो सकती है? वहीं कुछ ने इसे कर्मचारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया। कई प्रोफेशनल्स ने यह भी कहा कि कंपनियां कर्मचारियों को ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए प्रेरित करती हैं, लेकिन जब वही कर्मचारी सोशल मीडिया पर एक्टिव होते हैं, तो उन पर पाबंदी लगाई जाती है, जो दोहरे मापदंड को दिखाता है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, जब तक कोई कर्मचारी गोपनीय जानकारी साझा नहीं कर रहा या कंपनी की छवि को नुकसान नहीं पहुंचा रहा, तब तक इस तरह की सख्त पाबंदियां न्यायसंगत नहीं मानी जा सकतीं। वहीं HR एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों को स्पष्ट सोशल मीडिया गाइडलाइंस बनानी चाहिए, न कि डराने वाले फरमान जारी करने चाहिए। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ की सीमा आखिर कहां खत्म होती है। फिलहाल, यूजर्स का गुस्सा साफ दिख रहा है और कई लोग ऐसी कंपनियों की कार्यसंस्कृति पर सवाल उठा रहे हैं, जो कर्मचारियों की डिजिटल आज़ादी पर अंकुश लगाने की कोशिश करती हैं।



