Epilepsy Myths vs Facts: क्या दौरे में जूता सुंघाना या चम्मच डालना फायदेमंद है?

एपिलेप्सी यानी मिर्गी को लेकर समाज में आज भी कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं। फिल्मों, टीवी और सुनी-सुनाई बातों के आधार पर लोग अक्सर ऐसे कदम उठा लेते हैं जो मरीज के लिए खतरनाक भी हो सकते हैं। सबसे आम मिथक यही है कि दौरा पड़ने पर मरीज के मुंह में चम्मच, कपड़ा या उंगली डाल देनी चाहिए ताकि वह जीभ न काट ले। विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि ऐसा करना गलत है। इससे दांत टूट सकते हैं, जबड़े में चोट लग सकती है या उल्टा सांस की नली ब्लॉक हो सकती है। सच यह है कि दौरे के दौरान मरीज की जीभ निगल जाने जैसी बात संभव नहीं होती। बेहतर यही है कि व्यक्ति को करवट लिटा दें, आसपास की नुकीली या सख्त चीजें हटा दें और दौरा खत्म होने तक उसे सुरक्षित रखें।
दूसरा बड़ा मिथक है कि जूता या प्याज सुंघाने से दौरा रुक जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। दौरा अपने समय पर खुद रुकता है। तीसरी गलतफहमी यह है कि मिर्गी छूने से फैलती है, जबकि यह पूरी तरह से गलत है। यह कोई संक्रामक बीमारी नहीं है। चौथा मिथक यह है कि एपिलेप्सी वाले लोग सामान्य जीवन नहीं जी सकते। सही इलाज, दवाओं और सावधानियों के साथ वे पढ़ाई, नौकरी, शादी और खेलकूद सब कर सकते हैं। पांचवां मिथक यह है कि दौरा आने पर मरीज को जोर से पकड़कर रोकना चाहिए, जबकि ऐसा करने से फ्रैक्चर या मांसपेशियों में चोट का खतरा बढ़ सकता है।
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि दौरा पांच मिनट से ज्यादा चले, बार-बार आए या मरीज को होश न आए तो तुरंत मेडिकल मदद लें। सही जानकारी ही मरीज की सुरक्षा और सम्मान दोनों की रक्षा करती है। इसलिए अफवाहों पर नहीं, डॉक्टरों की सलाह पर भरोसा करना जरूरी है।



