अफ्रीका स्प्लिटिंग: महाद्वीप दो हिस्सों में टूटने की प्रक्रिया तेज

वैज्ञानिकों के अनुसार Africa में एक बड़ी भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसमें धरती की सतह (क्रस्ट) में गहरी दरारें बन रही हैं। यह दरार धीरे-धीरे महाद्वीप को दो हिस्सों में विभाजित करने की दिशा में बढ़ रही है।
यह प्रक्रिया मुख्य रूप से टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण हो रही है, जिसे भूगर्भीय भाषा में “रिफ्टिंग” कहा जाता है। पूर्वी अफ्रीका क्षेत्र में यह प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, जहां जमीन धीरे-धीरे अलग हो रही है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है, बल्कि लाखों वर्षों में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि इसकी गति अपेक्षा से अधिक तेज होने के कारण शोधकर्ताओं की चिंता बढ़ गई है।
इस प्रक्रिया का सबसे अधिक प्रभाव East African Rift क्षेत्र में देखा जा रहा है, जहां जमीन में लंबी-लंबी दरारें बनती जा रही हैं। कुछ जगहों पर यह दरारें इतनी स्पष्ट हो गई हैं कि सड़कें और खेत तक प्रभावित होने लगे हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, टेक्टोनिक प्लेटों के धीरे-धीरे अलग होने से भविष्य में एक नया महासागर भी बन सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती है और इसे पूरी तरह विकसित होने में लाखों साल लग सकते हैं।
Africa में हो रहे इस बदलाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। सैटेलाइट इमेज और भूगर्भीय अध्ययन के जरिए वैज्ञानिक इसकी गति और दिशा को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह अध्ययन न केवल पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझने में मदद करता है, बल्कि यह भी बताता है कि हमारा ग्रह लगातार बदल रहा है और इसकी सतह स्थिर नहीं है।



