सेना प्रमुख धीरज सेठ बने नेपाली सेना के मानद जनरल, 1950 की परंपरा कायम

भारत और नेपाल के सैन्य संबंधों में सोमवार को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नेपाली सेना के मानद जनरल की उपाधि प्रदान की। यह सम्मान काठमांडू के शीतल निवास में आयोजित विशेष समारोह में दिया गया।
मानद जनरल की यह उपाधि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चली आ रही सैन्य परंपरा का हिस्सा है। वर्ष 1950 से दोनों देश एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को मानद जनरल की रैंक प्रदान करते रहे हैं। करीब 76 साल पुरानी यह परंपरा दोनों सेनाओं के बीच ऐतिहासिक संबंधों और आपसी सम्मान को दर्शाती है।
जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के दौरान उन्हें नेपाली सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। उन्होंने नेपाली सेना के प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग तथा आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
भारत और नेपाल के बीच सैन्य सहयोग काफी पुराना है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और उच्चस्तरीय सैन्य यात्राओं की परंपरा रही है। ऐसे में सेना प्रमुख की यह यात्रा रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जनरल सेठ की यात्रा का एक अहम पहलू सैन्य और चिकित्सा उपकरणों से जुड़ा सहयोग भी रहा। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने नेपाली सेना को कुछ सैन्य और चिकित्सा उपकरण सौंपे। इससे दोनों सेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करने का संकेत मिलता है।
भारत-नेपाल संबंध केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्ते भी बेहद गहरे हैं। ऐसे में सेनाओं के बीच मजबूत संपर्क दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
नेपाल में सेना प्रमुख को मानद रैंक प्रदान करने की परंपरा का खास महत्व है। यह केवल औपचारिक सम्मान नहीं बल्कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच विश्वास और पारस्परिक सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है।
जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा ऐसे समय हुई है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर संबंधों को मजबूत करने की कोशिश जारी है। रक्षा क्षेत्र में उच्चस्तरीय संवाद से साझा सुरक्षा हितों और सैन्य सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर जनरल धीरज सेठ को नेपाली सेना के मानद जनरल की उपाधि मिलना भारत-नेपाल सैन्य संबंधों के लिए प्रतीकात्मक और महत्वपूर्ण घटना है। 1950 से चली आ रही यह परंपरा आज भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच मजबूत रिश्तों की पहचान बनी हुई है।



