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Bangladesh Energy Crisis: बिजली संकट में भारत से मदद की गुहार, क्या होगा जवाब?

बांग्लादेश में ऊर्जा संकट लगातार गहराता जा रहा है। गैस की कमी ने बिजली उत्पादन को प्रभावित किया है, जिसके चलते देश के कई हिस्सों में लंबे समय तक बिजली कटौती देखने को मिल रही है।

 स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बांग्लादेश सरकार ने बिजली की खपत कम करने के लिए व्यावसायिक गतिविधियों पर भी पाबंदियां लगाई हैं। शॉपिंग मॉल, बाजार और दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है।

इस संकट के पीछे सबसे बड़ी वजह प्राकृतिक गैस और LNG की कमी बताई जा रही है। ईंधन की उपलब्धता घटने से कई बिजली संयंत्रों का संचालन प्रभावित हुआ है और बिजली उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं हो पा रहा है।

संकट के बीच बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति की मदद मांगी है। दोनों देशों के बीच पहले से डीजल सप्लाई की व्यवस्था है, लेकिन ढाका ने इस सप्लाई को बढ़ाने का अनुरोध किया है।

 भारत ने बांग्लादेश की मांग को सीधे खारिज नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अतिरिक्त पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के अनुरोध की समीक्षा की जा रही है। हालांकि भारत अपने घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और देश में डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखकर फैसला करेगा।

 भारत पहले से बांग्लादेश को बिजली और ईंधन की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। त्रिपुरा के रास्ते भी बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति होती रही है और पिछले एक दशक में इस कारोबार से राज्य की बिजली कंपनी को बड़ी आमदनी हुई है।

 बांग्लादेश की मौजूदा परेशानी केवल बिजली की कमी तक सीमित नहीं है। ईंधन की कमी का असर उद्योगों, दुकानों, बाजारों और रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। कुछ इलाकों में कई घंटों तक बिजली कटौती की रिपोर्ट सामने आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की ऊर्जा निर्भरता ने मौजूदा संकट को और गंभीर बनाया है। देश के बिजली मिश्रण में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी अभी करीब 6 प्रतिशत बताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक पहले से ज्यादा सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता होती तो संकट का असर कम किया जा सकता था।

बांग्लादेश ने 2030 तक करीब 10,000 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि इसे हासिल करने के लिए बड़े निवेश और नीतिगत समर्थन की जरूरत होगी।

फिलहाल सबकी नजर भारत के जवाब पर है। भारत के लिए भी यह फैसला आसान नहीं होगा, क्योंकि उसे अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों और उपलब्ध डीजल को ध्यान में रखना है। फिर भी दोनों पड़ोसी देशों के बीच मौजूदा ऊर्जा व्यापार को देखते हुए बांग्लादेश की मदद क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग का अहम उदाहरण बन सकती है।

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