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India-South Korea: भारत-दक्षिण कोरिया की बढ़ी रणनीतिक साझेदारी, जयशंकर के सियोल दौरे से चीन की बढ़ी चिंता

भारत और South Korea के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलती दिखाई दे रही है। विदेश मंत्री S. Jaishankar के सियोल दौरे के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच यह साझेदारी विशेष महत्व रखती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और दक्षिण कोरिया का बढ़ता सहयोग केवल आर्थिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका रणनीतिक आयाम भी है। दोनों देश मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था का समर्थन करते हैं। रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग बढ़ने से क्षेत्रीय संतुलन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि किसी भी आधिकारिक बयान में चीन का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि एशिया में बदलते शक्ति समीकरणों के बीच भारत और दक्षिण कोरिया की नजदीकी पर China की नजर बनी हुई है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन आपूर्ति श्रृंखला और उच्च तकनीक क्षेत्रों में सहयोग को चीन के प्रभाव को संतुलित करने की व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

सियोल में हुई बैठकों के दौरान दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को बढ़ाने, नई तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान तथा रक्षा क्षेत्र में सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा की। भारत और दक्षिण कोरिया पहले से ही विशेष रणनीतिक साझेदार हैं, लेकिन हालिया वार्ताओं ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में यह संबंध और अधिक व्यापक तथा गहरा हो सकता है। ऐसे में जयशंकर का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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