
मिडिल ईस्ट में पिछले 40 दिनों से जारी संघर्ष ने भारी तबाही मचा दी है। इस दौरान हजारों मिसाइलें और ड्रोन दागे गए, जिन पर अरबों डॉलर खर्च हुए और 8000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। लगातार हो रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। अस्पताल, स्कूल और रिहायशी इलाकों पर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं और शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति की अपील कर रहा है, लेकिन हालात में सुधार के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही संघर्ष नहीं रुका, तो इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ेगा।



