Nepal Flood: बाढ़ के बाद नई आफत, पीने के पानी में मिला E. coli बैक्टीरिया

नेपाल में बाढ़ की तबाही से जूझ रहे लोगों के सामने अब दूषित पीने के पानी की नई चुनौती खड़ी हो गई है। नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका में किए गए पानी के परीक्षण में 15 में से 5 नमूनों में E. coli पाया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि पानी में E. coli की मौजूदगी आमतौर पर मल या सीवेज से होने वाले प्रदूषण का संकेत देती है।
15 में से 5 पानी के नमूने दूषित
बिदुर नगरपालिका के अलग-अलग पेयजल स्रोतों से कुल 15 नमूने लिए गए थे। इनमें से पांच नमूनों में E. coli बैक्टीरिया मिला। नगरपालिका के वरिष्ठ प्रयोगशाला तकनीशियन के अनुसार, जिन जल स्रोतों में बैक्टीरिया पाया गया, वहां क्लोरीनेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह जांच ऐसे समय में हुई है जब बाढ़ ने इलाके की सड़कों, पुलों और पेयजल व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाया है।
E. coli मिलने का क्या मतलब है?
E. coli एक ऐसा बैक्टीरिया है जो इंसानों और गर्म रक्त वाले जानवरों की आंत और मल में पाया जाता है। पीने के पानी में इसकी मौजूदगी इस बात का संकेत हो सकती है कि पानी किसी तरह सीवेज या मल से दूषित हुआ है।
ऐसा पानी बिना उपचार के पीना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। खासकर बाढ़ के बाद जब साफ पानी की उपलब्धता कम हो जाती है, तब दूषित पानी से संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा रहता है।
हैजा और डायरिया का बढ़ा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी पीने से डायरिया, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा हेपेटाइटिस A और E जैसी बीमारियां भी दूषित पानी के जरिए फैल सकती हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में यह खतरा इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि लोगों को कई बार सुरक्षित पेयजल नहीं मिल पाता और उन्हें उपलब्ध पानी के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
राहत शिविरों में भी स्वास्थ्य चिंता
बिदुर नगरपालिका ने प्रभावित लोगों के लिए कई आश्रय स्थलों की व्यवस्था की है। पेयजल आपूर्ति बाधित होने के कारण कुछ स्थानों पर टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में राहत शिविरों में सुरक्षित पानी और स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
भीड़भाड़ वाले शिविरों में अगर दूषित पानी पहुंचता है तो संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका और बढ़ सकती है।
हैजा वैक्सीन की तैयारी
नेपाल के स्वास्थ्य अधिकारी संभावित जलजनित रोगों के प्रकोप को रोकने के लिए भी तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जोखिम वाले करीब 1 लाख लोगों को हैजा वैक्सीन देने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही 15 साल से कम उम्र के 75 हजार से अधिक बच्चों को खसरा-रूबेला का टीका देने की तैयारी है।
अधिकारियों का कहना है कि अभी बड़े स्तर पर प्रकोप सामने नहीं आया है, लेकिन बाढ़ के बाद संक्रमण के जोखिम को देखते हुए निगरानी बढ़ाई जा रही है।
बाढ़ के बाद क्यों बढ़ता है पानी से बीमारी का खतरा?
बाढ़ का पानी अक्सर सीवेज, कचरे और अन्य दूषित पदार्थों के संपर्क में आ जाता है। अगर यही पानी पेयजल स्रोतों में पहुंच जाए तो उसमें हानिकारक बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव आ सकते हैं।
नेपाल में मानसून के दौरान पेयजल स्रोतों के दूषित होने की समस्या पहले भी सामने आती रही है। जुलाई 2026 में काठमांडू के विभिन्न इलाकों में किए गए परीक्षणों में भी पेयजल के नमूनों में E. coli और फीकल कोलीफॉर्म पाए गए थे।
सिर्फ बिदुर ही नहीं, नेपाल में व्यापक चुनौती
पानी की गुणवत्ता को लेकर समस्या केवल बिदुर तक सीमित नहीं है। नेपाल के एक हालिया सर्वेक्षण में भी देशभर के घरेलू पेयजल नमूनों के 60 प्रतिशत से अधिक में E. coli सहित हानिकारक सूक्ष्मजीव पाए जाने की बात सामने आई थी।
बाढ़ के बाद यह स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि कई इलाकों में पाइपलाइन, जल स्रोत और वितरण व्यवस्था क्षतिग्रस्त हुई है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि बिना उपचार के पानी न पिएं। प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया गया सुरक्षित या क्लोरीनेटेड पानी इस्तेमाल करना चाहिए। जहां सुरक्षित पानी उपलब्ध नहीं है, वहां स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार पानी को उबालकर या उचित तरीके से उपचारित करके ही पीना चाहिए।
खाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ धोना भी बेहद जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार दस्त, उल्टी, तेज कमजोरी या शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
बाढ़ के बाद दूसरी बड़ी चुनौती
नेपाल में बाढ़ ने पहले ही बड़ी मानवीय और बुनियादी ढांचागत तबाही मचाई है। अब पेयजल में E. coli मिलने से राहत एवं बचाव अभियान के सामने स्वास्थ्य संकट रोकने की नई चुनौती आ गई है।
प्रशासन के लिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना, जल स्रोतों की नियमित जांच, क्लोरीनेशन और राहत शिविरों में स्वच्छता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा। समय रहते इन कदमों पर ध्यान नहीं दिया गया तो बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का प्रकोप स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
कुल मिलाकर, बिदुर के 15 में से 5 पेयजल नमूनों में E. coli मिलना नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में बढ़ते स्वास्थ्य जोखिम का संकेत है। प्रशासन ने दूषित स्रोतों में क्लोरीन डालना शुरू कर दिया है और संभावित हैजा व अन्य बीमारियों से निपटने की तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में पानी की गुणवत्ता और संक्रमण के मामलों की निगरानी बेहद अहम रहेगी।



