Nepal Tunnel Rescue: 9 दिन बाद जिंदा निकले कबीर महर्जन, परिवार ने नहीं छोड़ी उम्मीद

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच नौ दिन बाद एक ऐसी खबर सामने आई जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों को नेपाली सेना और सुरक्षा बलों की टीम ने जिंदा बाहर निकाल लिया। इनमें कबीर महर्जन और संजय साह शामिल हैं। दोनों करीब नौ दिनों तक सुरंग के भीतर फंसे रहे। कबीर के परिवार के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था।
नौ दिन तक टीवी के सामने बैठा रहा परिवार
कबीर महर्जन के परिवार ने बताया कि पिछले नौ दिन बेहद मुश्किल रहे। परिवार को लगातार यही चिंता थी कि सुरंग के अंदर कबीर किस हालत में होंगे और क्या वह कभी वापस लौट पाएंगे।
कबीर के पिता के मुताबिक, इन दिनों परिवार के लिए खाना तक निगलना मुश्किल हो गया था। वे लगातार टीवी और समाचारों पर नजर बनाए हुए थे और किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार नौवें दिन वह खबर आई जिसका परिवार को बेसब्री से इंतजार था—कबीर जिंदा हैं और उन्हें सुरंग से बाहर निकाल लिया गया है।
बहन बोलीं- जन्माष्टमी पर भाई को मिला नया जीवन
कबीर की बहन ने बताया कि उन्हें भाई के जिंदा बचने की जानकारी ऑनलाइन खबरों और सोशल मीडिया के जरिए मिली। इसके बाद परिवार तुरंत अस्पताल पहुंचा।
उन्होंने इस घटना को नया जीवन मिलने जैसा बताया और कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन उनके भाई ने भी नया जीवन पाया है। परिवार ने रेस्क्यू टीम का आभार जताते हुए सुरंग में फंसे अन्य लोगों के सुरक्षित बाहर आने की भी प्रार्थना की।
सुरंग के अंदर से आई आवाज ने जगाई उम्मीद
रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब बचाव दल को सुरंग के अंदर से लोगों की आवाजें सुनाई दीं। इसके बाद टीम ने अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की।
आवाज मिलने के बाद बचावकर्मियों को यह पुष्टि हो गई कि सुरंग में कुछ लोग अभी जीवित हैं। इसके बाद मलबा हटाने और अंदर तक पहुंचने का अभियान और तेज किया गया।
170 मीटर अंदर मिले दोनों कर्मचारी
रिपोर्टों के अनुसार कबीर महर्जन और संजय साह सुरंग के भीतर करीब 170 मीटर अंदर मिले। बचाव दल ने उन्हें बाहर निकालते समय ऑक्सीजन की सहायता भी दी। नौ दिनों तक अंधेरे और बेहद कठिन परिस्थितियों में फंसे रहने के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकालना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
कबीर और संजय की हालत कैसी है?
रेस्क्यू के बाद दोनों कर्मचारियों को चिकित्सा सहायता दी गई। कबीर महर्जन को हेलिकॉप्टर के जरिए काठमांडू ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। संजय साह का इलाज नुवाकोट के त्रिशूली अस्पताल में जारी है।
कुछ रिपोर्टों में दोनों के शरीर पर चोट और लंबे समय तक सुरंग में रहने के कारण ऑक्सीजन की कमी से जुड़े लक्षणों का उल्लेख किया गया है। हालांकि दोनों को जीवित बाहर निकाल लिया जाना अपने आप में बड़ी राहत है।
संजय ने बाहर आते ही दी बड़ी जानकारी
सुरंग से बाहर आने के बाद संजय साह ने बताया कि अंदर अन्य लोगों के भी जीवित होने की संभावना है। उनके इस बयान से बचाव दल और परिवारों की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं।
रेस्क्यू टीम अब सुरंग के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने और वहां फंसे संभावित लोगों का पता लगाने में जुटी है। सुरंग से आवाजें सुनाई देने की खबरों ने भी इस उम्मीद को मजबूत किया है कि कुछ और लोगों को जिंदा बचाया जा सकता है।
26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही
यह हादसा 26 अगस्त 2026 को नेपाल और तिब्बत सीमा के पास हुई प्राकृतिक आपदा के बाद सामने आया। बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही हुई और कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुईं।
कई परियोजनाओं की सुरंगों और आसपास के इलाकों में मलबा भर गया, जिसके कारण वहां काम कर रहे कर्मचारियों से संपर्क टूट गया।
सैकड़ों कर्मचारी अब भी लापता
दो कर्मचारियों को जिंदा बचाए जाने से राहत जरूर मिली है, लेकिन संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। नेपाल के विभिन्न जलविद्युत प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे सैकड़ों लोगों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने भी कई परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी दी है।
इसलिए कबीर और संजय का बचाव सिर्फ दो जिंदगियों की वापसी नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण है जिनके अपने अभी भी सुरंगों और आपदा प्रभावित इलाकों में फंसे हुए हैं।
9 दिन तक कैसे जिंदा रहे?
नौ दिनों तक सुरंग के अंदर फंसे रहने के बावजूद दोनों का जिंदा मिलना कई मायनों में असाधारण है। सुरंग के भीतर कुछ हिस्सों में हवा की उपलब्धता और अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह मिलने से उनके जीवित रहने में मदद मिली हो सकती है। बचाव दल ने अंदर पहुंचकर उन्हें ऑक्सीजन उपलब्ध कराई और सुरक्षित बाहर निकाला।
संजय के बाहर आने के बाद सामने आई जानकारी से यह भी पता चलता है कि अंदर फंसे लोगों ने कठिन परिस्थितियों में अपना मनोबल बनाए रखने की कोशिश की।
परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं
नौ दिनों तक जिस परिवार को हर पल अनहोनी का डर सता रहा था, उसके लिए कबीर का जिंदा वापस आना भावुक कर देने वाला पल था। परिवार ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा और लगातार उनके सुरक्षित लौटने की प्रार्थना करता रहा।
रेस्क्यू की खबर मिलते ही परिवार अस्पताल पहुंचा। उनकी खुशी और राहत इस बात को दिखाती है कि आपदा के बीच किसी अपने के जिंदा मिलने की खबर कितनी बड़ी उम्मीद बन सकती है।
कबीर महर्जन और संजय साह का नौ दिन बाद सुरंग से जिंदा निकलना नेपाल की इस भयावह आपदा के बीच राहत और उम्मीद की सबसे बड़ी खबरों में से एक है। अब रेस्क्यू टीम की नजर सुरंग और अन्य प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे बाकी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है।



