पाकिस्तान से पढ़े-लिखों का पलायन, आर्मी चीफ के बयान पर सवाल

पाकिस्तान में आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता का असर अब बड़े पैमाने पर ब्रेन ड्रेन के रूप में सामने आ रहा है। बीते दो वर्षों में करीब 14 लाख पढ़े-लिखे पाकिस्तानी देश छोड़ चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि सिर्फ इस साल ही लगभग 16 हजार डॉक्टर और इंजीनियर पाकिस्तान से बाहर चले गए हैं, जिससे देश की स्वास्थ्य और तकनीकी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, सुरक्षा चिंताएं और सीमित अवसर इस पलायन की प्रमुख वजहें हैं। उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद युवाओं को न तो स्थिर नौकरियां मिल पा रही हैं और न ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी। ऐसे में विदेशों में बेहतर अवसरों की तलाश पाकिस्तानियों को देश छोड़ने पर मजबूर कर रही है।
इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख के पुराने बयान का भी मजाक उड़ाया जा रहा है, जिसमें उन्होंने देश के उज्ज्वल भविष्य और युवाओं के भरोसे की बात कही थी। मौजूदा आंकड़े उन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब देश में हालात इतने खराब हैं, तो भविष्य की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह पलायन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और संस्थानों को लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है। पढ़े-लिखे वर्ग के बाहर जाने से देश के विकास की रफ्तार और धीमी होने की आशंका जताई जा रही है।



