नेपाल में फिर हिंदू राष्ट्र की मांग, शेर बहादुर देउबा ने बढ़ाई हलचल

नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले नेपाली कांग्रेस गुट ने सनातन धर्म को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान के रूप में आगे बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाली कांग्रेस मौजूदा धर्मनिरपेक्ष संविधान के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभा चुकी है।
देउबा ने अपने संबोधन में खुद को हिंदू बताते हुए कहा कि उनकी आस्था का मतलब अन्य धर्मों का विरोध करना नहीं है। उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रति भी सम्मान जताया। वहीं, उनके गुट के प्रस्ताव में सनातन, हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति धर्मों की रक्षा के साथ धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की बात कही गई है।
यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब नेपाल में कई हिंदू संगठन देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग कर रहे हैं। हाल में गृह मंत्री सुदन गुरुंग के साथ हिंदू संगठनों की बैठक के बाद भी इस मुद्दे ने सुर्खियां बटोरी थीं, हालांकि सरकारी अधिकारियों ने किसी औपचारिक समझौते से इनकार किया था।
वहीं, प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के सामने इस मुद्दे पर राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। नेपाल 2008 में धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बना था, इसलिए हिंदू राष्ट्र की बहाली के लिए संवैधानिक बदलाव की जरूरत होगी। फिलहाल देउबा के प्रस्ताव को तत्काल नेपाल के हिंदू राष्ट्र बनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बढ़ती राजनीतिक मांग के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
मुख्य बातें
- शेर बहादुर देउबा गुट ने सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने का प्रस्ताव रखा।
- नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग फिर जोर पकड़ रही है।
- देउबा ने अपनी हिंदू आस्था का खुलकर उल्लेख किया।
- प्रस्ताव में धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव पर भी जोर है।
- नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए संवैधानिक बदलाव जरूरी होगा।
- बालेन शाह सरकार के सामने इस मुद्दे पर राजनीतिक संतुलन की चुनौती है।



