ट्रंप की ओमान को बमबारी की धमकी, होर्मुज पर बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने नया तनाव पैदा कर दिया है। ट्रंप ने ओमान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह अमेरिकी प्रयासों में बाधा डालता है तो अमेरिका उसके खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप की नाराजगी का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। ईरान और ओमान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर एक व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं, जबकि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए अलग रणनीति अपना रहा है। ओमान की भूमिका इस पूरे संकट में बेहद अहम है। मस्कट लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच संवाद के लिए मध्यस्थ का काम करता रहा है। ऐसे में ओमान को सैन्य कार्रवाई की धमकी देना क्षेत्रीय कूटनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। संघर्ष से पहले वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता था। मौजूदा संकट के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। ईरान के साथ बातचीत भी फिलहाल किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है। अमेरिका-ईरान के बीच जून में हुए समझौते की 60 दिन की समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई, लेकिन स्थायी शांति समझौते पर प्रगति नहीं हो सकी।
ट्रंप ने इसी दौरान ईरान को आत्मसमर्पण करने की सलाह दी और कहा कि वह संघर्ष खत्म करने की जल्दबाजी में नहीं हैं। दूसरी ओर, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया है कि बातचीत विफल होने पर ईरान होर्मुज क्षेत्र में अपनी रणनीति को और आक्रामक कर सकता है। अगर अमेरिका और ओमान के बीच तनाव वास्तव में सैन्य टकराव में बदलता है, तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ सकता है। ओमान की भौगोलिक स्थिति और होर्मुज के दक्षिणी हिस्से से उसकी निकटता इसे इस संकट में बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
फिलहाल ट्रंप का बयान एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका ओमान पर हमला करने जा रहा है। वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि होर्मुज को लेकर अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत आगे किस दिशा में जाती है। कुल मिलाकर, ओमान को ट्रंप की धमकी ने ईरान युद्ध को एक नए मोड़ पर ला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल ईरान-अमेरिका विवाद का हिस्सा नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिरता का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।



