UN में भारत का संदेश: अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के लिए मांगा समझौता

संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत की ओर से बोलते हुए राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति ने कहा कि बाहरी अंतरिक्ष पूरी मानवता की साझा संपत्ति है। इसे संघर्ष का मैदान बनाने के बजाय देशों के बीच सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान और शांतिपूर्ण गतिविधियों का केंद्र बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम विकास और सुरक्षा, दोनों पहलुओं से जुड़ा है।
अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के लिए बाध्यकारी समझौते की मांग
भारत ने अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ की रोकथाम के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौते का समर्थन दोहराया। भारत चाहता है कि यह समझौता सभी देशों के लिए स्वीकार्य हो, उसके प्रावधानों के पालन की पुष्टि की जा सके और उस पर बहुपक्षीय बातचीत के माध्यम से सहमति बने। इस दिशा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन को महत्वपूर्ण मंच बताया गया है।
स्वैच्छिक नियम समझौते का विकल्प नहीं
सुधा मूर्ति ने कहा कि भारत ऐसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और उपायों के लिए भी तैयार है, जो सभी देशों पर समान रूप से लागू हों और भेदभावपूर्ण न हों। पारदर्शिता बढ़ाने तथा देशों के बीच विश्वास मजबूत करने वाले उपाय भी उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, भारत के अनुसार, स्वैच्छिक नियम और विश्वास निर्माण के उपाय कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते के पूरक होने चाहिए, उसका विकल्प नहीं।
दोहरे इस्तेमाल वाली अंतरिक्ष तकनीक बनी बड़ी चुनौती
अंतरिक्ष क्षेत्र में कई तकनीकों और उपकरणों का इस्तेमाल नागरिक तथा सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इसे दोहरे उपयोग वाली तकनीक कहा जाता है। सुधा मूर्ति ने कहा कि ऐसी तकनीकों का विस्तार हो रहा है और अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने के तरीकों पर देशों के बीच अभी भी मतभेद हैं।
भारत का कहना है कि अंतरिक्ष की सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक टिकाऊपन से जुड़े खतरों को एक साथ समझना जरूरी है। गलतफहमी, गलत आकलन और अंतरिक्ष में बल प्रयोग की सीमा जैसे मुद्दों पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होनी चाहिए।
शांतिपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधान पर नहीं लगनी चाहिए रोक
भारत ने जोर दिया कि अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए बनाए जाने वाले किसी भी नए अंतरराष्ट्रीय ढांचे से शांतिपूर्ण और वैध उद्देश्यों के लिए वैज्ञानिक तथा तकनीकी शोध के आदान-प्रदान पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए। एक विकासशील देश के रूप में भारत अंतरिक्ष तकनीक के जरिए विकास, नवाचार और जनकल्याण के अवसरों को बनाए रखना चाहता है। इसलिए सुरक्षा संबंधी नियम ऐसे होने चाहिए जो सहयोग को प्रोत्साहित करें और सभी देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करें।
चंद्रयान से गगनयान तक भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां
अपने वक्तव्य में सुधा मूर्ति ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का भी उल्लेख किया। भारत ने 2023 में चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी। अब देश मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, भारत की योजना अपना राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksha Station), विकसित करने की भी है। ये योजनाएं भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम और वैज्ञानिक क्षमताओं को दर्शाती हैं।
अंतरिक्ष का भविष्य सहयोग और साझा जिम्मेदारी पर निर्भर
भारत का संदेश है कि बाहरी अंतरिक्ष का उपयोग किसी एक देश के हित तक सीमित नहीं होना चाहिए। अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों में सुरक्षा, पारदर्शिता, वैज्ञानिक प्रगति और सभी देशों के हितों का संतुलन आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट नियम और प्रभावी सहयोग भविष्य में गलतफहमियों तथा संभावित टकराव के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसी उद्देश्य से भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अंतरिक्ष को सहयोग का क्षेत्र बनाए रखने और हथियारों की होड़ रोकने के लिए बाध्यकारी समझौते की आवश्यकता दोहराई।



