US India: अमेरिकी सीनेटर बोले- मेरा फोन भारत जाता है, चीन नहीं

भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों के बीच एक अमेरिकी सीनेटर का बयान सुर्खियों में है। उन्होंने कहा, “मेरा फोन मेरे साथ भारत जाता है, लेकिन चीन कभी नहीं।” इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने भारत को एक भरोसेमंद लोकतांत्रिक साझेदार और सुरक्षित सहयोगी के रूप में पेश किया, जबकि चीन को लेकर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताओं का संकेत दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और भारत रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि अमेरिका के कई नीति-निर्माताओं के उस व्यापक दृष्टिकोण को भी दर्शाती है, जिसमें भारत को विश्वसनीय रणनीतिक भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, व्यापार, उन्नत तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को लेकर कई अहम समझौते हुए हैं। वहीं, चीन के साथ तकनीकी सुरक्षा, साइबर जोखिम और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर अमेरिकी नेताओं की चिंताएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में सीनेटर का यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों की बढ़ती निकटता और चीन को लेकर अमेरिकी रणनीतिक सोच को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।



