कलिनिनग्राद क्यों है रूस के लिए इतना अहम?

कलिनिनग्राद रूस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बाल्टिक क्षेत्र में उसकी सैन्य और रणनीतिक मौजूदगी का प्रमुख केंद्र है। रूस के पास यहां वायु रक्षा, मिसाइल और नौसैनिक क्षमताएं हैं। CSIS के अनुसार, कलिनिनग्राद में S-400 वायु रक्षा प्रणाली भी तैनात है, जो क्षेत्र में रूसी सैन्य परिसंपत्तियों की हवाई सुरक्षा में भूमिका निभाती है।
कलिनिनग्राद की भौगोलिक स्थिति इसे रूस-NATO तनाव में विशेष महत्व देती है। यह रूस का ऐसा एक्सक्लेव है जिसकी सीमाएं NATO सदस्य देशों पोलैंड और लिथुआनिया से लगती हैं। इसी वजह से बाल्टिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा रणनीति के संदर्भ में इस क्षेत्र पर लगातार नजर रहती है।
रूस की हालिया चेतावनी एक राजनयिक नोट के जरिए NATO तक पहुंचाई गई। Reuters के अनुसार, मॉस्को ने कहा कि अगर NATO देश कलिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्से से अलग-थलग करने की कोशिश करते हैं तो रूस अपनी उपलब्ध पूरी सैन्य क्षमता, जिसमें परमाणु हथियार भी शामिल हैं, का इस्तेमाल कर सकता है। रूस ने इसे अपने क्षेत्र की रक्षा से जोड़ा है।
NATO ने रूस के दावे को स्वीकार नहीं किया और कहा कि उसकी सैन्य गतिविधियां तथा अभ्यास रूस के क्षेत्र के लिए खतरा नहीं हैं। NATO ने साथ ही रूस से परमाणु बयानबाजी से बचने की अपील की है। इससे बाल्टिक क्षेत्र में पहले से मौजूद रूस-NATO तनाव के बीच परमाणु जोखिम को लेकर चर्चा और बढ़ गई है।
S-400 भी कलिनिनग्राद की सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली वायु रक्षा प्रणाली है और CSIS के अनुसार इसके कुछ संस्करणों की अधिकतम प्रभावी रेंज लगभग 400 किलोमीटर तक बताई जाती है, हालांकि कुछ क्षमताओं और तैनाती की स्थिति को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है।



