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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 3 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से किया बर्खास्त, ये तीनों आतंकी संगठन के लिए कर रहे थे काम

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का एक-एक करके सफाया किया जा रहा है। इनका साथ देने वाले लोगों की भी पहचान कर जेल में डाला जा रहा है। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को 3 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है, जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (HM) के लिए काम कर रहे थे।

आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने में लगे हैं उपराज्यपाल

अगस्त 2020 में पदभार ग्रहण करने के बाद से मनोज सिन्हा ने सक्रिय आतंकवादियों और उनके सहायक नेटवर्क, जिसमें ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) और सरकारी संस्थानों में शामिल समर्थक शामिल हैं। दोनों को निशाना बनाकर आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को कमजोर करने को प्राथमिकता दी है।

2020 से 2024 के बीच सैकड़ों आतंकी मारे गए

सिन्हा ने आक्रामक आतंकवाद विरोधी अभियान सुनिश्चित किए हैं, जिसमें सुरक्षाबलों ने 2020 से 2024 के बीच जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों आतंकवादियों को मार गिराया। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत 75 से अधिक OGW/आतंकवादियों के सहयोगियों को सरकारी नौकरियों से बर्खास्त किया है। उन्होंने आतंकवाद और उनके सहायक ढांचों को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया है। साथ ही आतंकवादियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की है।

तीनों बर्खास्त कर्मचारियों की पहचान उजागर की गई

तीनों बर्खास्त कर्मचारी अब जेल में बंद हैं। इन तीनों की पहचान भी उजागर की गई है। इसमें मलिक इश्फाक नसीर है, जो कि पुलिस कांस्टेबल के पद पर था। दूसरा स्कूल शिक्षा विभाग में टीचर था, इसका नाम एजाज अहमद है। तीसरा श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में जूनियर असिस्टेंट के पद पर था, इसका नाम वसीम अहमद खान है।

सक्रिय रूप से आतंकी संगठन के लिए कर रहे थे काम

एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि उपराज्यपाल द्वारा बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मचारी सक्रिय रूप से आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे थे। आतंकवादियों को सुरक्षा बलों और नागरिकों पर आतंकी हमले करने में मदद कर रहे थे।

राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा

उन्होंने कहा, ‘पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में एक जासूस और एक खतरनाक आतंकवादी सहयोगी का होना एक बहुत बड़ा खतरा है। इसका जारी रहना राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता के लिए बेहद खतरा हो सकता है।

पुलिस की आड़ में आतंकियों का साथ

मलिक इश्फाक नसीर को 2007 में जम्मू-कश्मीर पुलिस में कांस्टेबल के रूप में भर्ती किया गया था। उसका भाई मलिक आसिफ नसीर लश्कर का पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकवादी था। उसे 2018 में एक मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। हालांकि, मलिक ने अपनी आतंकी गतिविधियों को बेखौफ जारी रखा और पुलिस कांस्टेबल होने के कारण वह किसी भी संदेह से बचने में सक्षम था। सितंबर, 2021 में उसका लश्कर से संबंध तब उजागर हुआ, जब जम्मू-कश्मीर पुलिस जम्मू क्षेत्र में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी से संबंधित एक मामले की जांच कर रही थी। वहीं, अब उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।

शिक्षक की आड़ में आतंकियों का साथ

स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक एजाज अहमद हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (HM) के लिए काम कर रहा था। 2011 में उसे शिक्षक के तौर पर भर्ती किया गया था। वह पुंछ क्षेत्र में एचएम का भरोसेमंद आतंकी सहयोगी बन गया था। वह हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी में आतंकी संगठन की सक्रिय रूप से मदद कर रहा था। एचएम के साथ आतंकी संबंध नवंबर 2023 में उजागर हुए जब पुलिस ने नियमित जांच के दौरान एजाज और उसके दोस्त को गिरफ्तार किया। दोनों एजाज की टोयोटा फॉर्च्यूनर में हथियार, गोला-बारूद और एचएम के पोस्टर ले जा रहे थे।

आतंकियों को पहुंचाता था गोला-बारूद

आगे की जांच में पता चला था कि खेप उसके हैंडलर आबिद रमजान शेख के निर्देश पर प्राप्त हुई थी, जो पीओजेके में एचएम का आतंकवादी है। यह खेप कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों को सुरक्षाबलों और नागरिकों पर हमले करने के लिए दी जानी थी। जांच में आगे पता चला कि एजाज पिछले कई सालों से हथियारों और गोला-बारूद की बड़ी खेप प्राप्त कर रहा था। इसे कश्मीर घाटी में आतंकवादियों तक पहुंचा रहा था।

डॉक्टर बनकर आतंकियों का दे रहा था साथ

मंगलवार को बर्खास्त किए गए एक अन्य सरकारी कर्मचारी वसीम अहमद खान, सरकारी मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर में जूनियर असिस्टेंट था। उन्हें 2007 में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त किया गया था। अगस्त 2018 में एचएम संगठन के साथ उसके आतंकी संबंधों का खुलासा हुआ था। सुरक्षा प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, वसीम अहमद खान उस साजिश के साजिशकर्ताओं में से एक पाया गया, जिसके कारण 14 जून 2018 को आतंकवादियों द्वारा पत्रकार शुजात बुखारी और उनके दो पीएसओ की हत्या कर दी गई थी।

अहमद खान ने आतंकियों को भगाने में की थी मदद

वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, ‘वह लश्कर और हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा था, जिन्होंने पाकिस्तान की आईएसआई के निर्देश पर शुजात बुखारी की हत्या की थी। उसने श्रीनगर में सचिवालय में तैनात सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के खिलाफ हमले को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों को महत्वपूर्ण रसद सहायता भी प्रदान की थी। वह हमले को अंजाम देने के दौरान आतंकवादियों के साथ था और बाद में उन्हें भागने में मदद की थी। उसे 12 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया गया था, जब पुलिस बटमालू में एक आतंकी हमले में शामिल आतंकी सहयोगियों की जांच कर रही थी।’

नई भर्तियों में जांच प्रक्रिया को मनोज सिन्हा ने किया मजबूत

बता दें कि मनोज सिन्हा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हर सरकारी विभाग में नई भर्तियों के लिए जांच प्रक्रियाओं को मजबूत किया है। आतंकी समर्थकों द्वारा घुसपैठ को रोकने के लिए पुलिस सत्यापन को अनिवार्य किया है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि आतंकी सहयोगियों की समाप्ति ने संभावित आतंकी सहयोगियों के बीच डर पैदा किया है और आंतरिक तोड़फोड़ की संभावना कम कर दी है। अधिकारी ने कहा, ‘उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बहुआयामी दृष्टिकोण- आक्रामक आतंकवाद विरोधी अभियानों, आतंकवाद के वित्तपोषण को बाधित करने और सरकार में से समर्थकों और मुखबिरों को हटाने के संयोजन ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को काफी कमजोर कर दिया है।’

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