GST बना व्यापारियों के लिए सिरदर्द? जानें क्यों है झंझट
“जब तक पुराने नियम समझते हैं, तब तक नए लागू हो जाते हैं…” – ये शिकायत आज हर छोटे और मध्यम व्यापारी की है। GST (वस्तु एवं सेवा कर) को लागू हुए कई साल हो चुके हैं, लेकिन इसका जमीनी स्तर पर असर अब भी व्यापारियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
नियमों में बार-बार बदलाव, तकनीकी दिक्कतें, पोर्टल की समस्याएं, और समय पर रिटर्न दाखिल न करने पर भारी जुर्माना – ये सब मिलकर GST को एक जटिल और बोझिल प्रक्रिया बना देते हैं।
छोटे दुकानदारों से लेकर होलसेल व्यापारियों तक, सभी का मानना है कि वे अपने व्यवसाय के बजाय अब “टैक्स नियमों” को समझने में ज्यादा समय बर्बाद कर रहे हैं।
GST की सबसे बड़ी चुनौती है — इसका बार-बार बदलना। व्यापारी जब तक पुराने नियमों को समझते और अपनी प्रक्रिया को उसके अनुसार ढालते हैं, तब तक कोई नया सर्कुलर या अधिसूचना आ जाती है। इससे कन्फ्यूजन बढ़ता है और गलती की संभावना भी। छोटे दुकानदारों के लिए हर बार चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स कंसल्टेंट पर निर्भर रहना आसान नहीं होता।
GST का पूरा सिस्टम ऑनलाइन है, लेकिन तकनीकी खामियां इसकी सबसे बड़ी कमजोरी हैं। GSTR-1, GSTR-3B, और अन्य रिटर्न दाखिल करते समय पोर्टल अक्सर स्लो या डाउन हो जाता है। इसके अलावा, डेटा मिलान और ITC क्लेम में आई गड़बड़ियों का खामियाजा व्यापारियों को भुगतना पड़ता है।



