विदेशों में नौकरी करने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब ऐसे भारतीयों को अपना प्रोविडेंट फंड (PF) वापस मिलेगा। भारत सरकार ने इस दिशा में अहम कदम उठाते हुए ब्रिटेन के साथ PF ट्रांसफर और रिफंड को लेकर एक समझौता फाइनल कर लिया है।
इस योजना के तहत जो भारतीय कर्मचारी विदेशों में कंपनियों में काम कर रहे हैं और जो वहां के सामाजिक सुरक्षा कानूनों के तहत PF जैसी कटौतियां झेलते हैं, उन्हें अब दोहरी कटौती (Double Deduction) का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे उनकी आर्थिक हानि रुकेगी और PF की पूरी राशि वापसी की सुविधा मिलेगी।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने जानकारी दी कि जल्द ही इस योजना को अन्य देशों के साथ भी लागू करने की कोशिश की जा रही है, जिससे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपियन यूनियन में कार्यरत लाखों भारतीयों को लाभ होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम प्रवासी भारतीयों के हितों की रक्षा करेगा और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की नीति को मज़बूती देगा। साथ ही यह भरोसा भी बढ़ाएगा कि सरकार विदेश में काम कर रहे भारतीयों के हक में ठोस काम कर रही है।
कई सालों से विदेशों में काम कर रहे भारतीयों को वहां की कंपनियों के अनुसार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में योगदान देना पड़ता था। जबकि भारत में भी उनके वेतन से PF कटता है। इस वजह से प्रवासी भारतीयों को दोनों देशों में डबल PF कटौती झेलनी पड़ती थी, जिससे उनका वेतन और सेविंग्स प्रभावित होती थीं।
अब भारत और ब्रिटेन के बीच हुए सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट (SSA) के तहत यह तय हुआ है कि ऐसे भारतीय कर्मचारियों को अब दोहरा योगदान नहीं देना होगा और वे अपना PF भारत लौटकर क्लेम कर सकते हैं।
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अब भारतीय कर्मचारियों को ब्रिटेन में PF नहीं देना होगा, अगर वे भारत में पहले से PF कटवा रहे हैं।
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रिटायरमेंट के बाद भारतीय कर्मचारी PF क्लेम कर सकेंगे, भले ही वे भारत वापस आ गए हों।
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यह समझौता स्थायी निवासियों (Permanent Residents) और वर्क वीजा होल्डर्स दोनों के लिए लागू होगा।
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यह कदम EPFO और ब्रिटेन की पेंशन एजेंसी के बीच डेटा शेयरिंग और सत्यापन की व्यवस्था भी करेगा।
भारत ने अभी तक करीब 20 देशों के साथ सोशल सिक्योरिटी समझौते किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
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जर्मनी
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फ्रांस
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बेल्जियम
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ऑस्ट्रिया
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कनाडा
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ऑस्ट्रेलिया
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कोरिया
अब सरकार की नजर अमेरिका, UAE और खाड़ी देशों पर भी है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं।



