4.5 लाख करोड़ से 4 गुना बढ़ेगा कृषि निर्यात: गोयल
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक अहम बयान में कहा है कि भारत का कृषि निर्यात वर्तमान में जो ₹4.5 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर है, उसे आने वाले वर्षों में चार गुना तक बढ़ाया जा सकता है। यानी यह आंकड़ा ₹18 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जो भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय को एक नई ऊंचाई तक ले जाने में मददगार साबित होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह तभी संभव है जब कुछ नीतिगत और संरचनात्मक सुधार किए जाएं।
मंत्री गोयल ने कहा कि अगर किसानों को तकनीक से जोड़ा जाए, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और वैश्विक मानकों के अनुसार निर्यात को बढ़ावा दिया जाए तो भारत विश्व स्तर पर कृषि उत्पादों का एक बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत के पास जैविक कृषि, बागवानी, मसाले, चाय, कॉफी और कई प्रकार के फलों और सब्ज़ियों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा करने की पूरी क्षमता है।
गोयल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है कि वे एग्री-बिज़नेस, एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन) और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश करें ताकि निर्यात के लिए उपयुक्त सप्लाई चेन तैयार हो सके। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर, कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क, और लॉजिस्टिक्स को मज़बूत करना भी कृषि निर्यात को बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत पहले से ही चावल, गेहूं, दालें, मसाले, और ऑर्गेनिक उत्पादों के निर्यात में दुनिया के टॉप देशों में शामिल है, लेकिन अब समय आ गया है कि उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों, जैसे कि प्रोसेस्ड फूड, डेयरी प्रोडक्ट्स, और फलों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग की जाए।
अगर सरकार द्वारा सुझाई गई रणनीतियां प्रभावी ढंग से लागू की जाती हैं और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम किया जाता है, तो यह लक्ष्य मुश्किल नहीं होगा। यह वृद्धि न केवल भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामिण क्षेत्र में रोजगार और आय के अवसरों को भी कई गुना बढ़ा सकती है।



