
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर युवाओं को रोजगार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रोजगार मेला के तहत 51,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस अवसर पर उन्होंने वर्चुअल माध्यम से देशभर के नव-नियुक्त कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक खास बात कही – “बिना पर्ची, बिना खर्ची, अब हमारी पहचान”। यह केवल एक बयान नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की पारदर्शिता नीति का प्रतीक है।
पीएम मोदी ने कहा कि पहले जहां सरकारी नौकरियों के लिए सिफारिशें, घूस और पर्चियों का बोलबाला होता था, वहीं अब मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर भर्ती हो रही है। उन्होंने बताया कि सरकारी भर्तियों को पूरी तरह डिजिटाइज़ किया गया है, जिससे मानव हस्तक्षेप की गुंजाइश कम हो गई है और भर्ती प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष हो गई है।
प्रधानमंत्री ने इस पहल को ‘न्यू इंडिया’ की पहचान बताते हुए कहा कि आज भारत उन युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दे रहा है जो योग्यता के दम पर कुछ करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि देश सेवा का अवसर है और हर युवा को इसका जिम्मेदारी के साथ पालन करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले एक वर्ष में लाखों युवाओं को केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है, और आने वाले समय में ये प्रयास और तेज़ होंगे। सरकार का लक्ष्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार बनाना है।
इस पहल को देशभर में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, खासकर उन क्षेत्रों से जहां पारंपरिक रूप से सरकारी नौकरियों के लिए भ्रष्टाचार और सिफारिश का बोलबाला था।
इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अब उस दिशा में बढ़ रहा है जहां सरकारी नौकरी किसी ‘जुगाड़’ का नहीं, बल्कि मेहनत और योग्यता का फल होगी। ‘बिना पर्ची, बिना खर्ची’ अब केवल एक नारा नहीं बल्कि भारत के प्रशासनिक तंत्र की बदलती सोच का प्रमाण बन चुका है।



