भारत ने अपनी सैन्य रणनीति और युद्ध सिद्धांतों में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और अधिक निर्णायक और आक्रामक बनाना है। लंबे समय से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद और सीमापार हमलों से जूझ रहे भारत ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। इस बदलाव के तहत सेना को पहले से कहीं अधिक स्वायत्तता और त्वरित कार्रवाई की छूट दी गई है।
नई नीति के तहत पांच प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं, जिनके तहत सेना अब जवाबी कार्रवाई में समय नहीं गंवाएगी। पहला, अब आतंकवादी हमलों के बाद जवाब देने के लिए राजनीतिक मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, सेना खुद हालात के अनुसार कार्रवाई तय कर सकेगी। दूसरा, सीमापार ठिकानों पर प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक यानी हमले से पहले ही खतरों को खत्म करने की अनुमति दी गई है। तीसरा, आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देशों के खिलाफ कूटनीतिक और सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी।
चौथा बड़ा बदलाव यह है कि भारत अब केवल रक्षात्मक रवैया नहीं अपनाएगा, बल्कि जहां से खतरा उत्पन्न हो रहा है, वहां जाकर जवाब दिया जाएगा। और पाँचवाँ, तकनीक और खुफिया सूचना को युद्ध नीति में केंद्रीय स्थान दिया गया है ताकि आतंकियों की गतिविधियों का पहले से पता चल सके और समय रहते कार्रवाई हो।
इस नई नीति को 2025 के परिप्रेक्ष्य में तैयार किया गया है, जिसमें भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए सर्जिकल स्ट्राइक, एयरस्ट्राइक जैसी कार्रवाई को एक स्थायी विकल्प के रूप में शामिल किया है। इसके अलावा, सीमा सुरक्षा बल (BSF), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया तेज हो सके।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक स्पष्ट संदेश देगा कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा। आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों को अब सोचना होगा कि हर हरकत का सीधा और करारा जवाब मिलेगा।
सरकार की इस रणनीतिक पहल का जनता और सेना दोनों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। अब यह बदलाव सिर्फ नीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर जमीन पर भी दिखाई देगा। भारत की यह नई युद्ध नीति निश्चित तौर पर आतंकवादियों के लिए एक कड़ा संदेश है – अब बख्शा नहीं जाएगा।



