मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निर्देश: अधिकारी जन समस्याओं के प्रति बनें संवेदनशील और जिम्मेदार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को जनता के प्रति संवेदनशील होने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान है, और इसके लिए प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जन शिकायतों पर लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
योगी आदित्यनाथ ने उच्चाधिकारियों की बैठक में कहा कि जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सच्चे अर्थों में “सुशासन” है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और विकास अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनसुनवाई पोर्टल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और समस्या निवारण शिविरों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक अधिकारी को हर दिन जनता से मिलना चाहिए ताकि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बना रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य जनता की सेवा है, और यह तभी संभव है जब अधिकारी संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ काम करें।” उन्होंने अफसरों को चेतावनी दी कि यदि किसी जिले या विभाग में शिकायतों के निस्तारण में ढिलाई पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
योगी सरकार लगातार “जनता की सरकार, जनता के द्वार” की नीति पर काम कर रही है। इसके तहत गांव-गांव तक विकास योजनाओं को पहुंचाने, गरीबों को लाभकारी योजनाओं से जोड़ने और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि हर योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
इस बैठक के बाद प्रशासनिक हलकों में यह संदेश साफ है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनता के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं चाहते। उनका यह रुख प्रदेश में जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



