CM योगी के निर्देशों से बदला परिदृश्य | उत्तर प्रदेश में पराली जलाने में गिरावट

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियान का सीधा असर इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी के रूप में सामने आया है। जहां पहले हर साल फसल कटाई के बाद पराली जलाने से प्रदेश का वातावरण धुंध और प्रदूषण से भर जाता था, वहीं अब सरकारी प्रयासों, किसानों की भागीदारी और वैकल्पिक समाधान अपनाने से स्थितियों में बड़ा सुधार हुआ है।
योगी सरकार ने पराली जलाने पर रोक के लिए बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की। प्रशासनिक स्तर पर कड़े निर्देश जारी किए गए, जिनमें कृषि अधिकारियों, राजस्व टीमों और पुलिस विभाग को संयुक्त कार्रवाई का आदेश दिया गया। ड्रोन सर्विलांस और सैटेलाइट मॉनिटरिंग से ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई, जहां पराली जलने की संभावना अधिक रहती है। इससे न केवल घटनाओं को तुरंत रोका गया बल्कि जिम्मेदार लोगों पर समय रहते कार्रवाई भी की गई।
सरकार ने किसानों को दंडित करने के बजाय उन्हें जागरूक करने पर ज्यादा जोर दिया। हजारों गांवों में पराली प्रबंधन पर जागरूकता अभियान चलाए गए। किसानों को यह समझाया गया कि पराली जलाने से मिट्टी की उपज क्षमता कम होती है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही पराली प्रबंधन मशीनों—हैप्पी सीडर, रोटावेटर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम—के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराई गई। इससे किसान बिना पराली जलाए खेतों की जुताई करने लगे।
कई जिलों में पराली से बनाए जाने वाले बायो-कोयला, कम्पोस्ट और बायो-फ्यूल जैसे विकल्पों को भी बढ़ावा मिला है। इससे न केवल किसानों को अतिरिक्त आय मिली, बल्कि पराली को उपयोगी संसाधन में बदलने का संदेश भी तेजी से फैला।
गांवों में बने ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ ने भी बड़ा योगदान दिया है, जहां किसान किराए पर मशीनें लेकर पराली को खेत में ही समेट सकते हैं। जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया कि छोटे किसानों को भी मशीनों का लाभ मिले।
योगी सरकार के इन संयुक्त प्रयासों का परिणाम यह है कि इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी दर्ज की गई। इससे प्रदूषण स्तर भी नियंत्रित हुआ है और प्रदेश के पर्यावरण को राहत मिली है। यह बदलाव न केवल सरकारी सख्ती का परिणाम है, बल्कि किसानों में बढ़ी जागरूकता का भी प्रतीक है।



