नए साल से पहले सिलीगुड़ी में बड़ा फैसला, बांग्लादेशी नागरिकों को होटल नहीं देंगे कमरा

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर में नए साल से पहले बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। स्थानीय होटल संगठनों और व्यापारिक इकाइयों ने कथित तौर पर यह फैसला लिया है कि नए साल के जश्न के दौरान बांग्लादेशी नागरिकों को होटलों में ठहरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस फैसले को लेकर इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और इसे सुरक्षा, स्थानीय हितों और बढ़ती भीड़ से जोड़कर देखा जा रहा है। होटल मालिकों का कहना है कि हर साल नए साल के मौके पर सिलीगुड़ी में भारी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे होटलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में प्राथमिकता घरेलू पर्यटकों और स्थानीय लोगों को देने का निर्णय लिया गया है।
होटल संगठनों का तर्क है कि हाल के वर्षों में सीमा से सटे इलाकों में अवैध घुसपैठ, दस्तावेजों की जांच और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं। इन्हीं कारणों से एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। हालांकि, इस फैसले को लेकर मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल भी उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी खास देश के नागरिकों को सामूहिक रूप से निशाना बनाना उचित नहीं है और इससे आपसी रिश्तों पर असर पड़ सकता है।
सिलीगुड़ी, जो उत्तर-पूर्व भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है, हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। खासकर नए साल और छुट्टियों के मौसम में यहां के होटल, रेस्तरां और पर्यटन स्थल पूरी तरह से भरे रहते हैं। ऐसे में इस तरह का बहिष्कार पर्यटन उद्योग पर भी असर डाल सकता है। कुछ होटल मालिकों का मानना है कि यह फैसला अस्थायी है और हालात सामान्य होने पर इसमें बदलाव किया जा सकता है।
वहीं, प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी तरह के भेदभाव की अनुमति नहीं दी जा सकती। पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल नए साल से पहले सिलीगुड़ी में लिया गया यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीति और प्रशासनिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।



