
रूस और युक्रेन के बीच जारी जंग को लेकर एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। हालिया बयानों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिए हैं कि यह युद्ध जल्द खत्म होने वाला नहीं है। पुतिन के इस रुख ने न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि लंबे समय से यह उम्मीद की जा रही थी कि किसी न किसी कूटनीतिक पहल से संघर्ष थम सकता है। पुतिन का कहना है कि रूस अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा और जब तक उसके उद्देश्य पूरे नहीं होते, तब तक पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। इस बयान को पश्चिमी देशों के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप पहले कई बार दावा कर चुके हैं कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे रूस और युक्रेन के बीच युद्ध को बहुत कम समय में खत्म कर सकते हैं। उन्होंने इसे अपनी कूटनीतिक क्षमता और व्यक्तिगत संबंधों का नतीजा बताया था। हालांकि पुतिन के ताजा बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ट्रंप की कोशिशें वास्तव में कारगर साबित होंगी या फिर यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध अब सिर्फ दो देशों का टकराव नहीं रह गया है, बल्कि इसमें नाटो, अमेरिका और यूरोपीय संघ के हित भी गहराई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी एक नेता की पहल से तुरंत समाधान निकलना आसान नहीं है। युद्ध के चलते युक्रेन को भारी मानवीय नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं रूस पर भी आर्थिक प्रतिबंधों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। पुतिन के बयान से यह साफ होता है कि रूस फिलहाल दबाव में आकर कोई बड़ा समझौता करने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देश युक्रेन को सैन्य और आर्थिक सहायता देकर रूस पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं। ऐसे हालात में शांति की राह और भी जटिल होती जा रही है। कुल मिलाकर पुतिन का यह बयान दुनिया को यह संकेत देता है कि रूस-युक्रेन की जंग लंबी खिंच सकती है और फिलहाल ट्रंप समेत किसी भी नेता की कोशिशों से तत्काल समाधान निकलने की उम्मीद कम ही नजर आती है।



