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1860 का पहला बजट: इतनी कम आय पर मिलती थी टैक्स छूट, आज सुनकर आएगी हंसी

भारत में इनकम टैक्स का इतिहास काफी पुराना और रोचक है। आज जहां आयकर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, वहीं इसकी शुरुआत औपनिवेशिक दौर में हुई थी। भारत में पहली बार 1860 में इनकम टैक्स लागू किया गया, जब देश पर ब्रिटिश शासन था। उस समय ब्रिटिश सरकार को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा था। इसी संकट से उबरने और राजस्व बढ़ाने के लिए तत्कालीन वित्त सदस्य सर जेम्स विल्सन ने भारत में आयकर की नींव रखी।

1860 में लागू किया गया इनकम टैक्स आज के आधुनिक टैक्स सिस्टम से काफी अलग था। यह कर मुख्य रूप से उन लोगों पर लगाया गया था, जिनकी आय एक निश्चित सीमा से अधिक थी। लेकिन उस दौर में समाज के कई वर्ग ऐसे भी थे, जिन्हें इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता था। सबसे पहले, किसानों और कृषि आय को पूरी तरह टैक्स से मुक्त रखा गया था। ब्रिटिश सरकार जानती थी कि भारत की अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है, और किसानों पर कर लगाने से असंतोष बढ़ सकता है।

इसके अलावा, कम आय वर्ग के लोगों को भी टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया था। जिनकी आय बहुत सीमित थी, उनसे कर वसूलने को व्यावहारिक नहीं माना गया। उस समय टैक्स मुख्य रूप से व्यापारियों, जमींदारों, उच्च पदों पर कार्यरत कर्मचारियों और संपन्न वर्ग पर केंद्रित था। साथ ही, कई धार्मिक और सामाजिक संस्थानों को भी टैक्स में छूट दी गई थी, क्योंकि उन्हें समाज सेवा से जुड़ा माना जाता था।

महिलाओं और मजदूर वर्ग की बड़ी आबादी भी उस समय प्रत्यक्ष रूप से इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती थी, क्योंकि उनकी आय या तो दर्ज ही नहीं होती थी या बहुत कम होती थी। इसके अलावा, कई रियासतों और स्थानीय शासकों के मामलों में भी अलग-अलग नियम लागू थे, जिससे वे प्रत्यक्ष कर से बचे रहते थे।

1860 का इनकम टैक्स स्थायी नहीं था, बल्कि इसे समय-समय पर बदला गया और कुछ वर्षों बाद हटा भी दिया गया। बाद में 1886 में एक अधिक व्यवस्थित और स्थायी आयकर अधिनियम लाया गया, जिसने आधुनिक भारतीय आयकर प्रणाली की नींव रखी। आज का इनकम टैक्स सिस्टम काफी व्यापक, पारदर्शी और डिजिटल हो चुका है, लेकिन इसकी जड़ें उसी 1860 के कानून में छिपी हैं।

इस प्रकार, भारत का पहला इनकम टैक्स न केवल आर्थिक जरूरत का परिणाम था, बल्कि उस दौर की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को भी दर्शाता है। 1860 में टैक्स से मुक्त वर्ग यह बताता है कि उस समय सरकार किन वर्गों पर बोझ डालना चाहती थी और किन्हें राहत देना जरूरी समझती थी।

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