Gold-Silver Record High: पहली बार $5000 पहुंचा सोना, चांदी ने बनाया नया रिकॉर्ड, निवेशकों में हलचल

वैश्विक सर्राफा बाजार में इतिहास रचते हुए सोने की कीमत पहली बार 5000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई है, वहीं भारत में चांदी ने भी नया कीर्तिमान बनाते हुए ₹3.53 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर छू लिया है। इस अचानक आई तेज़ी ने निवेशकों, कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं—तीनों को चौंका दिया है। सवाल यही है कि आखिर सोना-चांदी की कीमतों में ऐसा क्या हुआ कि दोनों कीमती धातुएं रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं?
सबसे बड़ी वजह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता मानी जा रही है। अमेरिका और यूरोप में मंदी की आशंका, बढ़ता कर्ज संकट और बैंकिंग सेक्टर की कमजोरी ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर मोड़ दिया है। जब भी दुनिया में आर्थिक या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, सोना और चांदी सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरते हैं। यही कारण है कि संस्थागत निवेशक और सेंट्रल बैंक बड़े पैमाने पर सोने की खरीद कर रहे हैं।
दूसरा अहम कारण डॉलर की कमजोरी है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट के चलते सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ता पड़ता है, जिससे उसकी मांग बढ़ जाती है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के संकेतों ने भी सोने को मजबूती दी है, क्योंकि कम ब्याज दरों के माहौल में नॉन-इंटरेस्ट एसेट्स जैसे सोना ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं।
चांदी की कीमतों में उछाल के पीछे सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि औद्योगिक मांग भी बड़ी वजह है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। सप्लाई सीमित होने और मांग बढ़ने से चांदी ने भी रिकॉर्ड स्तर छू लिया है।
भारत में कीमतें और तेज़ इसलिए दिख रही हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय भाव के साथ-साथ रुपये की कमजोरी और टैक्स का असर भी जुड़ जाता है। इसके अलावा शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन की आहट से घरेलू मांग भी बढ़ने लगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोना और चांदी दोनों ही ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं। हालांकि, इतनी तेज़ी के बाद कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि भावनाओं में आकर भारी निवेश न करें, बल्कि लंबी अवधि और संतुलित रणनीति के साथ ही कदम बढ़ाएं।



