ब्राजीलियन चिकन पर टैरिफ घटाने की मांग, क्या भारत में सस्ता इंपोर्टेड पोल्ट्री मीट मिलेगा?

भारत में पोल्ट्री उद्योग इन दिनों चर्चा के केंद्र में है, क्योंकि ब्राजील से आयात होने वाले चिकन पर लगे 100 प्रतिशत टैरिफ को शून्य करने की मांग तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यदि सरकार इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाती है, तो भारतीय बाजार में ‘ब्राजीलियन चिकन’ की एंट्री संभव हो सकती है। ब्राजील दुनिया के सबसे बड़े चिकन निर्यातकों में से एक है और वहां का पोल्ट्री उद्योग अत्याधुनिक तकनीक, बड़े पैमाने के उत्पादन और कम लागत के लिए जाना जाता है। ऐसे में यदि आयात शुल्क घटता है तो भारत में चिकन की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
फिलहाल भारत सरकार ने घरेलू पोल्ट्री उद्योग की सुरक्षा के लिए ऊंचा आयात शुल्क लगाया हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ 0 कर दिया जाता है तो भारतीय किसानों और छोटे पोल्ट्री कारोबारियों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत में लाखों लोग पोल्ट्री उद्योग से जुड़े हैं और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। सस्ता आयातित चिकन स्थानीय उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा को कठिन बना सकता है।
दूसरी ओर, उपभोक्ताओं के नजरिए से देखें तो आयात शुल्क कम होने पर चिकन की कीमतों में कमी आ सकती है। खासकर शहरी बाजारों में जहां डिमांड अधिक है, वहां ब्राजीलियन चिकन एक विकल्प के रूप में उभर सकता है। हालांकि खाद्य सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता जांच और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे। भारत में किसी भी विदेशी खाद्य उत्पाद को अनुमति देने से पहले सख्त परीक्षण और नियामक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा केवल पोल्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक व्यापार समझौतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से भी जुड़ा है। यदि भारत और ब्राजील के बीच किसी मुक्त व्यापार समझौते या द्विपक्षीय वार्ता के तहत टैरिफ में राहत मिलती है, तो इसका असर अन्य कृषि और खाद्य उत्पादों पर भी पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, ‘ब्राजीलियन चिकन’ का भारतीय बाजार में आना अभी संभावनाओं के दायरे में है। सरकार को उपभोक्ताओं के हित, किसानों की आजीविका और व्यापार संतुलन—तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या टैरिफ 100 प्रतिशत से घटाकर 0 किया जाता है और क्या भारतीय थाली में ब्राजील का चिकन जगह बना पाता है।



