
राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और कुछ ही मिनटों में मतदान की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राजनीतिक समीकरणों और विधायकों की संख्या को देखते हुए चार उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जिनमें प्रमुख रूप से नीतीश और नवीन समेत चार नाम शामिल हैं। इन उम्मीदवारों को अपने-अपने दलों के साथ सहयोगी दलों का भी पर्याप्त समर्थन मिल रहा है, जिसके कारण उनके राज्यसभा पहुंचने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। हालांकि चुनाव की असली दिलचस्पी पांचवीं सीट को लेकर बनी हुई है, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। दोनों पक्ष अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग की संभावना को खत्म करने के लिए लगातार रणनीति बना रहे हैं। मतदान से पहले दोनों खेमों के नेताओं ने विधायकों के साथ कई दौर की बैठकों का आयोजन किया और उन्हें पार्टी लाइन पर मतदान करने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांचवीं सीट का परिणाम पूरी तरह विधायकों की एकजुटता और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर करेगा। अगर किसी भी पक्ष में थोड़ी भी टूट या रणनीतिक गलती होती है तो समीकरण अचानक बदल सकते हैं। इस वजह से दोनों गठबंधन बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं और मतदान के दौरान हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय बैलेट के माध्यम से होगी, हालांकि पार्टी व्हिप और राजनीतिक अनुशासन के कारण विधायकों पर दबाव भी रहेगा कि वे अपने गठबंधन के उम्मीदवार को ही वोट दें। चुनाव के नतीजे आने के बाद यह साफ हो जाएगा कि पांचवीं सीट पर किस गठबंधन की रणनीति ज्यादा सफल रही। फिलहाल चार सीटों पर तस्वीर साफ दिख रही है, लेकिन पांचवीं सीट को लेकर जारी यह राजनीतिक मुकाबला राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुकाबला सिर्फ एक सीट का नहीं बल्कि दोनों गठबंधनों की राजनीतिक ताकत और एकजुटता की परीक्षा भी है। ऐसे में सभी की निगाहें मतदान प्रक्रिया और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं, जो यह तय करेंगे कि राज्यसभा में किस गठबंधन की ताकत कितनी बढ़ेगी।



